जबलपुर, बरेला, नईदुनिया प्रतिनिधि। श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवास के दौरान विभिन्न आश्चर्यकारी घटनाएं घटती रहती थीं। इनमें कुछ अच्छी, तो कुछ बुरी भी होती हैं। उन सब घटनाओं से वे तीनों कभी भी विचलित नहीं होते और अपनी प्रतिदिन की चर्या को व्यवस्थित ढंग से मर्यादा पूर्वक क्रियान्वित करते थे। जहां भगवान राम, पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण को धर्म के साथ-साथ जीवन जीने की कला सिखाते थे तो वहीं सीता माता भी वन के कष्टों से ना घबराते हुए पति और देवर की यथायोग्य सेवा करती थीं।

लक्ष्मण भी बड़े भाई और भावी की आज्ञा का पालन भक्ति पूर्वक करते थे। साथ ही वन में मिलने वालों से भी उनका व्यवहार समुचित और सबको प्रभावित करने वाला होता था। यह कहा जा सकता है की श्रीराम, सीता और लक्ष्मण का जीवन लाइफ मैनेजमेंट का जीता जागता उदाहरण था। आज के प्राणियों को भी प्रभु श्रीराम से अपने जीवन को व्यवस्थित करने की प्रेरणा लेनी चाहिए। उक्त उद्गार अहर्म योग प्रणेता मुनिश्री प्रणम्य सागर ने 'कौशल्या के नंदन राम कथा के पांचवे दिन व्यक्त किए।

ज्ञातव्य हो कि राष्ट्रसंत आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के शिष्य अर्हम योग प्रणेता मुनिश्री प्रणम्य सागर महाराज व मुनिश्री चंद्र सागर महाराज का बरेला नगर प्रवास चल रहा है। इस दौरान अर्हम योगी मुनिश्री के मुख़ारबिंद से धर्म नगरी के इतिहास में पहली बार 11 दिवसीय संगीतमयी श्री राम कथा का वाचन चल रहा है। कथा के पूर्व आचार्यश्री एवं मुनि द्वय का अष्ट द्रव्य से पूजन किया गया। नगर के रामभक्तों ने मुनिश्री को श्रीफल समर्पित किए। मुनिश्री ने श्रीराम, लक्ष्मण और सीता माता के साथ वन में घटने वाली विभिन्न घटनाओं का विवेचन किया।

नगर में प्रथम बार ऐसा आयोजन होने से समाज में भारी उत्साह और हर्ष का वातावरण बना है। मुनिश्री द्वारा प्रतिंद कथा के अंत में मन, वचन और काया की शुद्धि के लिए अर्हम ध्यान भी कराया जा रहा है। संध्या 5:30 बजे से गुरु भक्ति तथा अंतर्गूज कार्यक्रम चल रहा है। कथा के उपरांत प्रसाद वितरण और बाहर से आए श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था समिति द्वारा की गई है। सकल जैन समाज के पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं से उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।

Posted By: Jitendra Richhariya

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