जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सफाई कर्मियों का नियमितीकरण निरस्त किए जाने के आदेश को प्रथमदृष्ट्या अनुचित पाते हुए रोक लगा दी। साथ ही नगर परिषद चंदिया, उमरिया व सीएमओ सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।

न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता चंदिया उमरिया निवासी सुखनंदन सहित 7 की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता 1990 से नगर परिषद चंदिया, उमरिया में दैनिक वेतन भोगी सफाई कर्मी बतौर कार्यरत थे। मार्च 2019 में नगर परिषद चंदिया, उमरिया ने विधिवत प्रस्ताव पारित करके सभी याचिकाकर्ताओं को नियमित कर दिया। जिसके बाद मार्च 2019 से जुलाई 2019 तक नियमित कर्मी बतौर वेतन भी प्राप्त हुआ।

इसके बावजूद 17 जुलाई 2019 को सीएमओ ने मनमाने तरीके से एक आदेश पारित करके नगर परिषद चंदिया, उमरिया के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया। चूंकि सीएमओ ने अनाधिकार चेष्ट की है और याचिकाकर्ताओं को नोटिस तक नहीं दिया गया, अत: नैसर्गिक न्यायसिद्यांत की अवहेलना साफ है। ऐसे में रोक अपेक्षित है। कोर्ट ने मांग मंजूर करते हुए अंतरिम राहत दे दी।

Posted By: Hemant Upadhyay

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