जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंडला में पदस्थ रूरल हार्टिकल्चर एक्सटेंसन ऑफिसर के शहडोल तबादले पर रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता की मां के लकवाग्रस्त होने के बिंदु को गंभीरता से लेकर यह आदेश सुनाया। इसके तहत विभाग को 15 दिन के भीतर याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करने कहा गया है, तब तक उसे मंडला में ही पदस्थ रखे जाने की व्यवस्था दी गई है।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पंकज मरकाम की ओर से अधिवक्ता निशांत दत्त ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता और उसकी पत्नी दोनों शासकीय सेवा में हैं और मंडला में पदस्थ हैं। जबकि मां लकवाग्रस्त हैं, जिसकी सेवा की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता की है।

ऐसे में यदि शहडोल जाना पड़ा तो मां की सेवा में व्यवधान आएगा। शासकीय तबादला नीति के तहत पति-पत्नी दोनों को एक जगह पदस्थ रखने का प्रावधान है। लिहाजा, याचिकाकर्ता के तबादले पर रोक अपेक्षित है।