जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एसआई से अनुचित वसूली पर रोक लगा दी। इस अंतरिम आदेश के साथ ही राज्य शासन, गृह विभाग सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। इसके लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई चार जुलाई को निर्धारित की गई है। न्यायमूर्ति संजय दि्वेदी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

इस दौरान याचिकाकर्ता रायसेन निवासी रविंद्र सिंह की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, अमित स्थापक, शिवम शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पूर्व में हाई कोर्ट के निर्देश पर याचिकाकर्ता को वेतनमान प्रदान किया गया था। इस सिलसिले में सभी नियमों की पूर्ति की गई थी, लेकिन एसपी रायसेन ने मनमाने तरीके से वसूली का आदेश पारित कर दिया। इस रवैये के खिलाफ उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई। लेकिन समाधान नहीं किया गया। लिहाजा, हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। 14 जनवरी, 2022 को एसपी ने जो आदेश जारी किया, वह निरस्त किए जाने योग्य है।

हाई कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद स्थगनादेश पारित कर दिया। बहस के दौरान सेवा नियमों का हवाला दिया गया। एसपी द्वारा पारित वसूली आदेश को अवैधानिक करार दिया गया। इसके बावजूद आला अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न किए जाने को अनुचित रेखांकित किया गया। हाई कोर्ट के पूर्व निर्देश की अवमानना का भी आरोप लगाया गया। हाई कोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद अंतरिम राहत दी। अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के कई न्यायदृष्टांत रेखांकित किए। उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मनमानी की है। इसके पीछे दुर्भावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।

अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए

हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन को दरकिनार किए जाने के रवैये को चुनौती संबंधी याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि आवेदन पर नियमानुसार विचार कर निर्णय लिया जाए। याचिकाकर्ता अनुराग राणा की ओर से अधिवक्ता सचिन पांडे ने पक्ष रखा। उन्हाेंने दलील दी कि आवेदक के पिता शासकीय सेवा में थे। उनके न रहने पर नियमानुसार आवेदन किया गया। लेकिन मांग पूरी नहीं की गई। अनुचित तर्क देकर आवेदन निरस्त कर दिया गया। इससे आवेदक का परिवार संकट मेें आ गया है। जीवन-यापन मुश्किल हो गया है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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