जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि रेलवे ने समुचित सुविधाओं के अभाव के बावजूद मालगोदाम 24 घंटे खोलने का निर्णय ले लिया। कायदे से पहले सुविधाएं पूरी देनी चाहिए इसके बाद इस तरह के कदम उठाने चाहिए, लेकिन रेलवे ने मनमानी करते हुए मालगोदाम से जुड़े ठेकेदारों के लिए चिंता का वातावरण निर्मित कर दिया। इससे तंग आकर पहले शिकायतें की गईं। जब कोई नतीजा नहीं निकला तो कानूनी लड़ाई शुरू की गई। मामले पर सुनवाई के बाद महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया।

हाई कोर्ट ने झुकेही मालगोदाम में असुविधाओं को दूर किए जाने की मांग संबंधी याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि शिकायत पर विचार कर 15 दिन के भीतर समुचित निदान किया जाए। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता श्रीकृष्णा वेयर हाउसिंग एंड ट्रांसपोर्ट कांट्रेक्टर पंकज गुप्ता व संतोष कुमार गुप्ता की ओर से अधिवक्ता शंकर प्रसाद सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मंडल रेल प्रबंधक, जबलपुर द्वारा 11 जुलाई, 2022 को झुकेही मालगोदाम 24 घंटे लदान व उतरान कार्य के लिए खोले जाने का आदेश जारी किया है। सवाल उठता है कि जब झुकेही मालगोदाम में सुविधाओं का अभाव है, तो उन्हें दूर किए बिना इस तरह का आदेश कैसे जारी कर दिया गया। शून्य से 24 बजे तक कार्य के लिए खोलने के स्थान पर छह से 22 बजे तक खोलना ठीक होगा।

इस संबंध में याचिकाकर्ता पूर्व में 19 जुलाई, 2022 को अभ्यावेदन प्रस्तुत कर चुका है, लेकिन शिकायत दूर नहीं की गई, इसीलिए हाई कोर्ट आना पड़ा। याचिका में रेलवे बोर्ड के पत्र का भी हवाला दिया गया है, जिससे साफ है कि झुकेही मालगोदाम में असुविधाओं की भरमार है। लिहाजा, शिकायतें दूर होने तक 24 घंटे का नियम बदला जाए। समय पूर्ववत किया जाए।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close