जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट ने राज्य शासन को 10 दिन के भीतर इंदौर में तैनात डॉक्टर्स की ड्यूटी पॉलिसी पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामला कोरोना काल में मनमानी पदस्थापना को चुनौती से संबंधित है। अगली सुनवाई 1 जून को होगी। बुधवार को न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की कोरोना आपदाकालीन एकलपीठ के समक्ष वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता डॉ.जगदीश घोरे व अन्य की ओर से अधिवक्ता विष्णुदेव सिंह चौहान ने दलील दी कि कोरोना वायरस के इलाज के सिलसिले में राज्य शासन द्वारा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पदस्थ शासकीय डॉक्टर्स की ड्यूटी अति संवेदनशील शहर इंदौर में लगाई। 11 अप्रैल को जिन 31 डॉक्टर्स की ड्यूटी लगाई गई थी, उनमें से 7 की ड्यूटी निरस्त कर दी गई, किंतु शेष ड्यूटी में जुटे हैं।

उन्हें इंदौर में बिल्कुल रेस्ट नहीं मिल रहा है। इस वजह से उनकी हालत खराब है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इसी तरह वे कब तक तैनात रहेंगे? ड्यूटी ऑर्डर के तहत कब तक रहना है और कब वापस जाना है, इसका कहीं कोई जिक्र नहीं है। यहां तक कि ड्यूटी रोस्टर तक नदारद है। कायदे से ब्रेक मिलना चाहिए। समय-समय पर पुनः अपने जिले भेजा जाना चाहिए और दूसरे डॉक्टर्स को तैनात करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। इस सिलसिले में ग्रीन जोन के डॉक्टर्स अच्छा विकल्प हैं। हाई कोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद राज्य शसन को 10 दिन में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दे दिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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