जबलपुर,नईदुनिया प्रतिनिधि। मप्र उच्च न्यायालय ने राजधानी भोपाल के कोहेफिजा में संचालित होने वाले गुलबाग मैरिज गार्डन के संचालक अकबर हसन खान की याचिका को खारिज कर दिया। याचिका के जरिए भोपाल नगर निगम की उन नियम और शर्तों को चुनौती दी गई थी, जो मैरिज गार्डन के लाइसेंस के लिए लगाई गई थीं। न्यायमूर्ति शील नागू व न्यायमूर्ति एमएस भट्टी की युगलपीठ ने यह छूट दी कि याचिकाकर्ता इस बारे में जनहित याचिका में अपने लिए उपचार तलाश कर सकता है।

अकबर हसन खान की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उन्होंने कोहेफिजा खानूगांव, भोपाल में गुलबाग मैरिज गार्डन संचालन के लिए भोपाल नगर निगम को लायसेंस के लिए आवेदन दिया। अधिवक्ता मोहम्मद आदिल उस्मानी ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए बताया कि निगम ने याचिकाकर्ता को यह लायसेंस देने के पूर्व 30 दिसम्बर 2021 को कुछ वैधानिक औपचारिकताएं व शर्तें पूरी करने के लिए आदेश जारी किया। इसी आदेश को याचिका में चुनौती दी गई।

भोपाल नगर निगम की ओर से न्यायालय में बताया गया कि याचिकाकर्ता के गुलबाग मैरिज गार्डन में संचालित गतिविधियों को अवैध व जनहित के खिलाफ बताते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह अभी लम्बित है। 4 मई 2022 को इस याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस जमीन पर किसी भी तरह की गतिविधियों के संचालन पर रोक लगा दी थी।

राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा को पदोन्नति से न करे वंचित-

मप्र उच्च न्यायालय ने राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अरुण कुमार मिश्र को पदोन्नति से वंचित नहीं रखने के निर्देश राज्य सरकार को दिए। राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अरुण कुमार मिश्र की ओर से इस संबंध में प्रस्तुत आपत्ति, जवाब पर उच्च न्यायालय ने विधिवत विचार कर निर्णय करने को कहा। न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की पीठ ने कहा कि आने वाली पदोन्नति में मिश्रा को वंचित न रखा जाए एवं भारतीय पुलिस सेवा(आईपीएस) के सदस्य बनाने के लिए विचार किया जाए। कोर्ट ने कहा कि विभागीय पदोन्नति समिति का निर्णय याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। राज्य शासन को 30 दिन में निर्णय लेने के निर्देश दिए गए।

अपराध अन्वेषण शाखा जबलपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार मिश्रा की ओर से याचिका दायर हुई। जिसमें बताया गया कि उनके खिलाफ 24 फरवरी 2021 को आरोप पत्र जारी हुआ। उन पर आरोप था कि एक अन्य व्यक्ति प्रतीक जोशी के घर आयकर विभाग के द्वारा की गई छापे मारी में जो अभिलेखों बरामद हुए उसमें अरुण कुमार मिश्रा के नाम के साथ 7.5 करोड़ रुपये लिखा पाए जाने के साक्ष्य है। अरुण कुमार मिश्रा एवं जोशी के बीच फोन पर बातचीत भी हुई। उक्त आरोप पत्र भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर जारी किया गया।अधिवक्ता पंकज दुबे व अक्षय खंडेलवाल ने कोर्ट को बताया कि मिश्रा ने उक्त आरोप पत्र के विरुद्ध आपत्ति लगाते हुए उच्च न्यायालय में याचिका पेश की । कोर्ट ने 15 मार्च 2021 को मिश्रा के विरुद्ध आरोप पत्र स्थगित कर दिया।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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