जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। उमरिया निवासी अक्षित गुप्ता को जन्मजात दिव्यांगता से राहत मिल सकती है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल में उसकी कांक्लियर इम्पलांट सर्जरी की गई है। करीब पांच लाख रुपये का श्रवण यंत्र उसके कान के पीछे लगाया गया है। उसे स्पीच थेरेपी दी जा रही है। जिसके माध्यम से वह जल्द ही बोलने व सुनने लगेगा।

नाक कान गला रोग विभागाध्यक्ष डा. कविता सचदेवा ने बताया कि रामलखन गुप्ता का बेटा अक्षित जन्म से ही श्रवण बाधित दिव्यांगता की चपेट में था। उम्र बढ़ने के साथ जब उसकी बोलने व सुनने की ताकत नहीं लौटी तो उन्होंने चिकित्सीय परामर्श लिया। जिसके बाद मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के अंतर्गत अक्षित का पंजीयन करवाया। पंजीयन उपरांत मेडिकल कालेज अस्पताल में करीब पांच लाख रुपये कीमती श्रवण यंत्र कांक्लियर इम्पलांट सर्जरी द्वारा लगाया गया।

इधर, जन्मजात श्रवण बाधित बच्चे सुन सकते हैं, बोल सकते हैं। उनके उपचार की संपूर्ण व्यवस्था नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल में मौजूद है। उक्त बातें मेडिकल के डीन डा. प्रदीप कसार ने कही। श्रवण बाधित दिव्यांगों के लिए आयोजित रैली को डा. कसार ने मेडिकल परिसर से रवाना किया। रैली का आयोजन मेडिकल के नाक कान गला रोग विभाग द्वारा किया गया।

नाक कान गला रोग विभागाध्यक्ष डा. कविता सचदेवा ने बताया कि सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में श्रवण बाधित दिव्यांगता दूर करने के लिए जागरुकता रैली निकाली जाती है। इस दौरान श्रवण बाधित दिव्यांगों की तकलीफ को समझने व उनके उपचार की जानकारी दी जाती है।

जन्मजात श्रवण बाधित बच्चों को मशीन लगाकर अथवा कांक्लियर इम्लांट सर्जरी के माध्यम से बोलने व सुनने के योग्य बनाया जाता है। बचपन से सुनने व बोलने में असमर्थ बच्चों को उपचार से बेहतर लाभ मिलता है। इस दौरान छात्रों ने नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया। जिसके माध्यम से श्रवण बाधित बच्चों की तकलीफ को उजागर किया गया। रैली का स्वागत मेडिकल के अधीक्षक डा. राजेश तिवारी ने किया।

Posted By: Ravindra Suhane

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