जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हनुमानताल थाना क्षेत्र स्थित जैन मंदिर से सोमवार को गायब हुई माता पद्मावती की मूर्ति मंगलवार को वापसी मिल गई। यह मूर्ति जितने रहस्यमय ढंग से गायब हुई थी, उतने ही नाटकीय ढंग से वापस भी मिल गई। यह मूर्ति कहीं और नहीं मिली, बल्कि मंदिर समिति के पदाधिकारियों के पास से ही इसे बरामद किया गया। इसको लेकर अब कई तरह की बातें सामने आ रही हैं।

पुलिस मामले की कर रही जांच पड़ताल

सोमवार को जैसे ही इस मूर्ति के गायब होने का पता हनुमानताल पुलिस ने मामले की सघन पड़ताल शुरू कर दी। यह घटना लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ी रही इसलिए पुलिस ने तत्परता के साथ मामले को हैंडल करना शुरू किया। इस दौरान मंदिर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी बुलाकर पूछताछ शुरू की गई। जिससे पूरे रहस्य से पर्दा उठ गया। समिति के पदाधिकारियों ने कुबूल कर लिया कि मूर्ति चोरी नहीं हुई थी, बल्कि उसको वो लोग ही अपने साथ ले गए थे। उन्होंने कहा कि माता पद्मावती का नया मंदिर बनवाया जा रहा है। नए मंदिर में मूर्ति की स्थापना के उद्देश्य से ही उसे वहां से उठाया गया था।

मंदिर समिति में अलगाव

बताया जाता है कि मंदिरों समिति के सदस्यों में ही मतभेद हैं, जिसकी वजह से इस मामले में तिल का ताड़ बना दिया गया। समिति के एक धड़े ने जहां मामले की एफआईआर करवा डाली, जिसमें मूर्ति के चोरी हो जाने की बात कही गई। वहीं दूसरा पक्ष शुरू से ही मामले में अनभिज्ञता जताता रहा। जब पुलिस द्वारा दूसरे पक्ष के सदस्यों से कड़क तरीके से पूछताछ की गई तो उन्होंने मूर्ति यहां से वहां करने की बात कुबूल ली। फिलहाल पुलिस ने मूर्ति की बरामदगी कर ली है। आगे की कार्रवाई किस रूप में की जानी है- इसका निर्णय मंदिर समिति से संबंधित दोनों पक्षों से बातचीत के बाद तय किया जाएगा।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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