जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि । एक मोबाइल कंपनी द्वारा फ्री कॉलिंग सहित डाटा डाउनलोड करने दी जा रही सस्ती इंटरनेट सेवा लेने के चक्कर में शिक्षक, कर्मचारियों ने मोबाइल नंबर बदल लिए, लेकिन अब जब सख्ती से ई-अटेंडेंस लगवाई जा रही तो शिक्षक, कर्मचारियों के पसीने छूट रहे। शिक्षकों का कहना है कि जो मोबाइल नंबर एजुकेशन पोर्टल में दर्ज कराया था। वह तो बंद हो गया। नया नंबर पोर्टल में रजिस्टर्ड नहीं, अटेंडेंस कैसे लगाएं? शिक्षकों की इस समस्या को देखते हुए शिक्षा विभाग ने भी इसका तोड़ निकाला और शिक्षकों को ये छूट दे दी गई कि जब तक उनके नए मोबाइल नंबर अपटेड नहीं हो जाते तब तक शिक्षक अपने साथी के मोबाइल से अपना पासवर्ड डालकर ई-अटेंडेंस लगा सकेंगे।

ऐसी है ई-अटेंडेंस की स्थिति -

- 10 जून से ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई। इसे वेतन से भी जोड़ दिया गया।

- 7600 शिक्षक, कर्मचारियों में से 60 प्रतिशत ही लगा रहे अटेंडेंस।

- 3000 अभी भी नहीं लगा रहे।

इसलिए नहीं बढ़ पा रहा ई-अटेंडेंस का आंकड़ा -

- 2007 में बनाया गया एजुकेशन पोर्टल।

- सस्ती कॉलिंग, इंटरनेट के चक्कर में अधिकांश ने बदल लिए मोबाइल नंबर।

- पोर्टल में रजिस्टर्ड पुराने मोबाइल नंबर बंद हो गए, नया नंबर रजिस्टर्ड नहीं कराया।

- स्कूलों में गूगल टेग की मदद से जिम्मेदारों ने अक्षांश-देक्षांश की गलत जानकारी अपलोड की।

- स्कूल में खड़े होकर अटेंडेंस लगाने पर भी दूरी 4 से 40 किमी तक प्रदर्शित हो रही।

-शिक्षा मित्र साफ्टवेयर की गड़बड़ी के कारण 10.30 बजे अटेंडेंस लगाने की टाइमिंग गलत आ रही।

ई-अटेंडेंस में आ रही समस्याओं का भोपाल स्तर से सुधार हो रहा है। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से एम शिक्षा मित्र से अटेंडेंस लगाने वालों की अटेंडेंस लग रही है। जिनके नंबर रजिस्टर्ड नहीं फिलहाल वह दूसरे के मोबाइल से अपना पासवर्ड डालकर अटेंडेंस लगा सकते हैं। हेमंत खुहटानिया, जिला प्रभारी, एम शिक्षा मित्र

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