जबलपुर। कोरोना जैसी भयंकर महामारी के दौरान सांस व आक्सीजन महत्वपूर्ण रही है, पूरी दुनिया ने ये भयावह दृश्य देखा था। इसके बावजूद जिन पेड़ों से हमें आक्सीजन प्राप्त होती है, उन जीवनदायनी पेड़ों को बचाने की दिशा में ठोस प्रयास नहीं हुआ। इन्हें बचाने कोई मास्टरप्लान नहीं है, अपितु खुद सरकार ही विकास के नाम पर इनकी बलि चढ़ाने पर आमादा है। यह बहुत चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विकास के नाम पर विभिन्न परियोजनाओं के लिए वर्ष 2020 में 16 लाख से अधिक पेड़ काट दिए और प्रतिपूरक वृक्षारोपण में भी कोताही बरती गई। नागरिक उपभोक्ता मंच ने मध्य प्रदेश सरकार पर विकास के नाम पर पर्यावरण के विनाश का आरोप लगाते हुए बताया कि दिल्ली में भी विकास किया गया परंतु एक भी वृक्ष नहीं काटा गया अपितु 50 हजार पौधों का रोपण किया गया।लिहाजा, मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के पर्यावरण परिस्थिति को स्पष्ट करने श्वेत पत्र लेकर आए।

वृक्ष काटने में मध्यप्रदेश अव्वल : मनीष शर्मा प्रांतीय संयोजक नागरिक उपभोक्ता मंच ने बताया कि लोकसभा के वर्तमान सत्र में स्वयं पर्यावरण मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री द्वारा जानकारी प्रस्तुत की है, जिसमें बताया गया कि वर्ष 2020-21 में मध्यप्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं एवं संरचनाओं के निर्माण हेतु 1640532 वृक्षों को काटा गया।यह पूरे देश में सर्वाधिक है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर 30 लाख 95 हजार वृक्षों को काटा गया है। आंकड़े स्पष्ट कहते हैं संपूर्ण देश में काटे गए वृक्षों में आधे से अधिक मध्यप्रदेश में काटे गए। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दुगने वृक्ष लगाने का दावा किया गया परंतु उत्तरजीविता संबंधी कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं की। वहीं प्रतिपूरक वृक्षारोपण में मात्र 2.5 करोड़ रुपए खर्च किए गए। मनीष शर्मा ने बताया की सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई कमेटी के सुझाव को माने तो काटे गए वृक्षों की कीमत खरबों रुपए हो सकती है। कमेटी के अनुसार वृक्ष की आयु तथा अगले 25 वर्षों में उसके द्वारा दी जाने वाली आक्सीजन की कीमत के आधार पर एक-एक वृक्ष की कीमत पांच लाख तक मानी की जा सकती है।

श्वेत पत्र लाए सरकार: नागरिक उपभोक्ता मंच के प्रफुल्ल सक्सेना, सुधीर घरे, सुभाष चंद्र, मधुबाला श्रीवास्तव, आश्रिता पाठक, पवन कौरव, सज्जाद अली, अरविंद स्थापक, अभिषेक मेहरा, इमरान खान, शिवकुमार आदि ने मध्यप्रदेश सरकार को पत्र के माध्यम से यह मांग की है कि प्रदेश के बिगड़ते पर्यावरण व प्रदेश में बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव को स्पष्ट करने हेतु श्वेतपत्र लेकर आए ताकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सके।

Posted By: Shivpratap Singh

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