जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर को शिखर पर पहुंचाने के लिए नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने पिछले करीब चार वर्षों में आठ करोड़ रुपये से ज्यादा राशि खर्च दी। नागरिकों में स्व्च्छता के प्रति जागरूकता लाने के लिए कभी मार्बल राक तो कभी स्ट्रीट आर्ट फेस्टिवल कराया गया। हैक फास्ट, नियान रन, चित्रकारी जैसे बड़े-बड़े आयोजन कराए गए। यहां तक की बाहर से भी मोटी रकम देकर कलाकार भी बुलाए गए।

महानगरों के कलाकारों से स्वच्छता के गीत तैयार कर उन्हें कचरा गाडि़यों में जिंगल की तरह बजाया भी गया। बाहर से आए कलाकारों ने पूरे शहर को कैनवास की तरह उपयोग कर आकर्षक चित्र भी उकेरे। शहर को सुंदर बनाया। बावजूद इसके शहर के नागरिकों में स्वच्छता के संस्कार नहीं ला पाए।

अधिकांश लोग अब भी अपने घर को घर और सड़क, नालियों को कूड़ादान समझ कर जहां-तहां कचरा फेंक रहे हैं। जबकि इंदौर इस मामले में बेहद संजीदा है। यहां के नागरिक न गंदगी करते है न करने देते हैं । यहीं कारण है कि इंदौर पिछले पांच वर्षों से स्वच्छ सर्वेक्षण में शिखर पर है। हालांकि इसमें नागरिकों का दोष नहीं है। यदि घर, दुकान से समय पर रोजाना कचरा उठे तो कचरा बाहर फेंकने की जरूरत ही पड़े।

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सिर्फ विज्ञापन में ही तीन करोड़ फूंके: स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर को पहले पायदान तक पहुंचाने के लिए नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने वर्ष 2016 से 2019 तक नागरिकों को स्वच्छता का संदेश देने के लिए सिर्फ विज्ञापन पर ही करीब तीन करोड़ रुपये फूंक दिए गए। इसमें होर्डिंग, बैनर, पोस्टर, स्लोगन, वाल पेटिंग प्रतियोगिता, आउटडोर पब्लिसिटी, स्वच्छता अभियान कैंपेनिंग, प्रसार माध्यमों में विज्ञापन, स्वच्छता गीत आदि के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया गया।

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अधिकारी भी करते रहे मनोरंजन: स्वच्छ सर्वेक्षण के नाम पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारी भी ऐसे आयोजन के माध्यम से अपना मनाेरंजन करते रहे। इन करोड़ों रुपये में कईयों के वारे-न्यारे भी हुए। प्रतियोगिताओं के नाम पर संगीतमयी कार्यक्रमों में जितनी रकम उड़ाई गई यदि उस रकम का उपयोग मेन पावर और मशीनरी बढ़ाकर संसाधनों को बेहतर बनाने में किया जाता तो शायद कुछ सुधार हो भी सकता था। लेकिन जिम्मेदारों ने भी ध्यान नहीं दिया।

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इस तरह हुए बड़े आयोजन

- 6 करोड़ 19 लाख रुपये में इवेंट और प्रमोशन, विज्ञापन प खर्च किए।

- 1 करोड़ 50 लाख रुपये हर वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण में खर्च की गई।

- मार्बल राक, नियान रन, आर्ट फेस्टिवल जैसे बड़े आयोजन किए गए।

- आर्ट फेस्टिवल के तहत बाहर से कलाकरों को बुलाया गया।

- शहर भर में उकेरेंगे गए चित्र अब हो गए बदरंग।

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मैं हूं स्वच्छता प्रहरी

साफ सफाई की आदत शुरू से रही है। गंदगी चाहे घर पर हो या बाहर मुझे पंसद नहीं। न तो गंदगी करती है न दूसरे को करने देती हूंं मेरा यही प्रयास रहता है कि शहर भी घर की तरह स्वच्छ रहे। इसलिए आस-पास के नागरिकों से भी अपेक्षा करती है कि वे भी स्वच्छता की आदत लाए। जिससे शहर साफ-सुधरा और सुंदर दिखे।

अनीता जैन, नागरिक

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शहर को स्वच्छता के शिखर पर पहुंचाने के लिए नागरिकों में स्वंय सफाई की आदत डालनी होगी। तभी शहर अगली परीक्षा में सफल हो सकता है। इसके लिए अभी से प्रयास किए जाने चाहिए।

मीनू कांत शर्मा, नागरिक

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स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए जो प्रयास किए जा रहे है वे नाकाफी है। यदि घरों से कचरा समय पर रोजाना उठेगा तो लोग बाहर कचरा नहीं फेकेंगे। इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

स्टेनली नाबर्ट, नागरिक

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सफाई के प्रति जनजागरूकता लाने के प्रयासों के साथ स्वच्छता की दिशा में किए जा रहे कार्यों की सघन निगरानी भी जरूरी है। यदि जिम्मेदार अपने कार्य में गंभीरता बरतेंगे तो नागरिक भी उससे प्रभावित होंगे।

पं. नरेश तिवारी, नागरिक

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नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने नागरिकों में जागरूकता लाने के लिए जो इवेंट किए, विज्ञापनों में अच्छी खासी रकम खर्च कर दी। लेकिन जमीन पर सफाई की स्थिति में सुधार लाने के ठोस प्रयास नहीं किए। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था पटरी से उतरती गई और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। यदि समय रहते इसमें कड़ाई की जाती तो शहर भी स्वच्छता के नए आयाम तय करता।

राजेश सोनकर, निर्वतमान नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम

Posted By: Ravindra Suhane

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