जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। केन्द्र शासित प्रदेशों और देश के 28 राज्यों में जगह-जगह एक ही आईएमईआई नंबर पर कई मोबाइल फोन सक्रिय होने के प्रमाण पुलिस जुटा चुकी है। इनमें भी उत्तरप्रदेश ऐसा राज्य है जहां एक ही आईएमईआई नंबर पर सक्रिय मोबाइल फोन की संख्या सबसे ज्यादा है। यूपी में भी पश्चिमी उत्तरप्रदेश ज्यादा संवेदनशील है। मध्यप्रदेश टॉप-10 से बाहर है। दरअसल, एक ही आईएमईआई नंबर पर देश भर में 1 लाख से ज्यादा मोबाइल सक्रिय होने का बड़ा खुलासा करने के बाद जबलपुर पुलिस इस अपराध की तह तक पहुंचने के प्रयास में जुटी है। नेटवर्किंग कंपनियों व मोबाइल निर्माता वीवो को नोटिस जारी कर पुलिस ने तमाम दस्तावेज तलब किए हैं।

देश की सुरक्षा का सवाल फिर भी बीएसएनएल का पुराना ढर्रा : जबलपुर ने तमाम नेटवर्किंग कंपनियों को कुछ आईएमईआई नंबर सौंपे हैं। कंपनियों से जानकारी मांगी गई है कि संबंधित आईएमईआई नंबर पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं। पुलिस को अब तक 24 में से सिर्फ 6 सर्किल की जानकारी आइडिया, एयरटेल व जियो कंपनी ने उपलब्ध कराई है। जिसमें एक ही आईएमईआई नंबर पर सक्रिय 1 लाख से ज्यादा मोबाइल का पता चला है। हैरानी की बात यह है कि भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) पुलिस को अब तक डेटा नहीं दे पाई है। जबकि यह मामला देश की सुरक्षा से सीधा जुड़ा होना बताया जा रहा है।

यह हो सकता है खतरा : पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एक ही आईएमईआई पर कई मोबाइल सक्रिय होने का बड़ा खतरा सामने आ सकता है। आईएमईआई नंबर बदल जाने के कारण ऐसे मोबाइल की पतासाजी मुश्किल होगी जो किसी से लूटे या चोरी किए गए हों। इस स्थिति में अपराधी बार-बार वारदात कर आईएमईआई नंबर बदलवाकर बच निकलने की कोशिश में रहेगा। देशद्रोही ताकतों के हाथ में इस तरह के मोबाइल होने से संभावित खतरे का अनुमान लगाया जा सकता है।

धारा 102 में जब्त होंगे रेंज 3 हजार मोबाइल, व्यापारियों पर खतरा : नेटवर्क कंपनियों द्वारा दी गई पहले चरण की जानकारी में जबलपुर में एक ही आईएमईआई पर 125 तथा पुलिस रेंज के सभी जिलों को मिलाकर 3 हजार से ज्यादा मोबाइल का पता चला है। धारा 102 के तहत नोटिस जारी कर सभी मोबाइल फोन जब्त किए जाएंगे। इससे कई अन्य मोबाइल कारोबारियों का पता चलेगा जो गैरकानूनी तरीके से मोबाइल की आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ कर रहे हैं। मोबाइल को जब्त कर एक्सपर्ट से उनके मूल आईएमईआई नंबर का पता लगाया जाएगा। इससे पहले की आईएमईआई के वास्तविक उपभोक्ता का भी पता चल सकेगा। पुलिस की पूछताछ में ऐसे मोबाइल का पता आसानी से चल सकेगा जो लूट व चोरी के प्रकरण से संबंधित थे लेकिन आईएमईआई नंबर बदल जाने से अपराधी बचने में सफल रहे।

1200 रुपए में बदल देता था आईएमईआई नंबर : जिस मोबाइल की आईएमईआई बदलने से सिद्धि विनायक मोबाइल शॉप का प्रदीप ठाकुर पकड़ा गया वह मोबाइल उसके पास सुधार के लिए भेजा गया था। प्रदीप ने वीवो कंपनी के मोबाइल का सॉफ्टवेयर अपडेट कर आईएमईआई बदल दी। जिससे मोबाइल की मूल पहचान ही समाप्त हो गई। इसके बदले प्रदीप ने मोबाइल धारक से 1200 रुपए लिए थे।

हर मोबाइल में साफ्टवेयर के दो पार्ट : पुलिस महानिरीक्षक विवेक शर्मा के निर्देश पर प्रकरण की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) क्राइम शिवेश सिंह बघेल के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है। एएसपी बघेल ने बताया कि प्रत्येक मोबाइल में साफ्टवेयर के दो पार्ट (कनेक्टिंग और ऑपरेटिंग) होते हैं। कुछ कंपनियां मोबाइल का साफ्टवेयर समय-समय पर अपडेट करती रहती हैं। वीवो कंपनी के मोबाइल में आसानी से आईएमईआई कैसे बदल दिया गया इसका पता लगाने के लिए कंपनी से सिक्योरिटी फीचर की जानकारी मांगी गई है। मोबाइल कारोबारी प्रदीप ठाकुर किस साफ्टवेयर का उपयोग कर आईएमईआई बदल रहा था इसकी जांच कराई जा रही है।

यह है प्रक्रिया : एएसपी क्राइम बघेल ने बताया कि किसी भी मोबाइल के फीचर में प्रवेश करने के लिए मोबाइल निर्माता कंपनी के डेमो वाले आईएमईआई नंबर की आवश्यकता होती है। यह डेमो नंबर कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर को दिया जाता है। डेमो नंबर का उपयोग कर मोबाइल को फार्मेट करने के बाद मोबाइल में पुरानी आईएमईआई नंबर डाल दी जाती है। विशेष परिस्थिति में मोबाइल का आईएमईआई नंबर बदलने के लिए सुरक्षा की दृष्टि से तमाम नियम कायदे बनाए गए हैं, जिनका उल्लंघन अपराध की श्रेणी में आता है।

जबलपुर समेत जोन के अन्य जिलों में जितने भी मोबाइल एक आईएमईआई नंबर पर मिले हैं, उन्हें जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि पता लगाया जा सके कि मोबाइल लूट या चोरी के तो नहीं हैं। जो लोग ऐसे मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं उनकी प्रोफाइल क्या है। किन परिस्थितियों में और कहां आईएमईआई नंबर को बदलवाया गया। इस मामले को लेकर पुलिस मुख्यालय और केन्द्रीय गृह मंत्रालय से पुलिस संपर्क में है। - विवेक शर्मा, पुलिस महानिरीक्षक

Posted By: Prashant Pandey