जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट ने सौ फीसद क्षमता के साथ स्कूल खुलने तक सिर्फ ट्यूशन फीस वसूले जाने पर बल देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। मामला प्रशासनिक न्यायाधीश शील नागू व जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की युगलपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए लगा। इस दौरान जस्टिस कौरव ने साफ किया कि वे न्यायमूर्ति बनने से पूर्व महाधिवक्ता के रूप में ट्यूशन फीस मामले में राज्य शासन की ओर से पक्ष रख चुके हैं, इसलिए मामला अन्य बेंच में सुनवाई के लिए लगाया जाना चाहिए। इसी आधार मुख्य न्यायमूर्ति रवि मलिमठ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ में एक सप्ताह बाद इस मामले की सुनवाई की व्यवस्था दे दी गई।

क्या है मामला : नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के प्रांताध्यक्ष डा. पीजी नाजपांडे व नयागांव, जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव की ओर से दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि जब तक राज्य में सौ फीसद क्षमता के साथ स्कूल नहीं खुल जाते, तब तक सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली जाए। जनहित याचिका में इस बात का हवाला दिया गया है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते पिछले दिनों राज्य सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत स्कूलों में केवल 50 फीसदी उपस्थिति और आनलाइन कक्षाएं जारी रखने कहा गया है।

क्या थे पूर्व निर्देश : इस मामले में हाईकोर्ट ने चार नवंबर, 2020 को निर्देश दिए थे कि जब तक कोरोना महामारी की समाप्ति की घोषणा नहीं हाेती या स्कूल पूरी तरह फिजिकली शुरू नहीं होते तक महज ट्यूशन फीस वसूली जाए।जनहित याचिका में बताया गया है कि राज्य सरकार ने 29 जून, 2021 को निजी स्कूलों को फीस में 10 फीसदी बढ़ोतरी की छूट दी थी। मामला हाईकोर्ट पहुंचा तब शासन ने आठ जुलाई को आदेश जारी किया केवल ट्यूशन फीस ही वसूली जाए। अब सरकार ने 22 नवंबर को पूर्व में जारी आदेश को शून्य कर नजी स्कूल प्रबंधन को पूरी फीस वसूलने की छूट दे दी है।जनहित याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अवगत कराया कि सरकार ने राजस्थान राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का हवाला देकर 22 नवंबर का आदेश जारी किया था। उनका कहना है कि राजस्थान के संबंध का आदेश मध्यप्रदेश में लागू नहीं होगा।

Posted By: Ravindra Suhane

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