MP High Court : जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के उद्योगों को बिजली बिल में छूट की मांग पर 3 सप्ताह में निर्णय लिए जाने के निर्देश दिए। इसी के साथ एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज की याचिका का पटाक्षेप कर दिया गया।शुक्रवार को न्यायमूर्ति सुजय पॉल की कोरोना आपदाकालीन एकलपीठ के समक्ष वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता एसोसियेशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज, मंडीदीप की ओर से अधिवक्ता आदित्य नारायण शर्मा ने पक्ष रखा। राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव व शासकीय अधिवक्ता राजेश्वर राव अपीयर हुए। बिजली विभाग का पक्ष अधिवक्ता सिद्धार्थ शर्मा ने रखा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिकाकर्ता एसोसियेशन को नए सिरे से अभ्यावेदन प्रस्तुत करने स्वतंत्र कर दिया। जिस पर विचार के बाद राज्य शासन को अधिकतम 3 सप्ताह के भीतर निर्णय लेना होगा।

क्या था मामला

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि लॉकडाउन के बीच राज्य के उद्योग जगत को पटरी पर आने के लिए सरकार से कुछ राहत अपेक्षित है। दो माह से बंद उद्योगों को कम से कम बिजली के बिलों के सिलसिले में छूट अवश्य दी जानी चाहिए। कायदे से लॉकडाउन पीरियड में बिजली की खपत शून्य होने पर इस अवधि का बिल फिक्स चार्ज के स्थान पर 'जितनी खपत-उतना बिल' प्रणाली के आधार पर वसूला जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को राज्य के औद्योगिक संगठनों ने ई-धरना देकर फिक्स चार्ज का विरोध भी किया था। ऑनलाइन विरोध के दौरान उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने साफ किया था कि राज्य के चार प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में जनवरी में 2660 मेगावाट बिजली का यूज हुआ, जबकि अप्रैल में यह खपत रिड्यूज होकर 1000 मेगावाट पर आ गई। मई में भी कमोवेश यही हालत रही। ऐसे में पूर्व की खपत के आधार पर बिल वसूली उद्योगों को शुरू करने से पहले ही परेशानी में डालने जैसा कदम होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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