जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में खुले में अनाज सड़ने के मामले में संयुक्त कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रवि विजय कुमार मलिमथ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने राज्य शासन को आगामी सुनवाई से पूर्व कार्ययोजना भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को अगली सुनवाई निर्धारित की गई है।

जबलपुर निवासी गुलाब सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ व अधिवक्ता हिमांशु मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सरकार हर साल किसानों से समर्थन मूल्य में अनाज खरीदती है, लेकिन अनाजों को सुरक्षित गोदामों में नहीं रखा जाता है। इसके कारण हर साल बारिश में लाखों टन अनाज सड़ जाता है।

इसी साल जुलाई में राज्य शासन ने 10 लाख टन अनाज क्रय किया, जिसका बड़ा भंडार खुले में सड़ने पड़ा हुआ है। जिस राशि में इसे क्रय किया गया, बाद में उससे काफी कम महज दो-तीन रुपये किलो के हिसाब से शराब निर्माताओं को बेच दिया जाएगा। यह हर साल की कहानी है। अनाप-शनाप रेट में खरीदी करते हैं और फिर कम दाम में बेच देते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि किसानों से खरीदे गए अनाज को गोदामों में अधिकतम 6 माह और खुले में तीन माह तक ही रख सकते है। अनाज भंडारण गृहाें में अधिकतम छह माह व खुले में महज तीन माह रख सकते हैं। राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब में कहा गया कि कुछ जगह 7 से 19 महीने तक खुले में अनाज रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की वाणिज्यिक विभाग की याचिका, ई-वे बिल में पता गलत लिखने पर लगाई थी 22 लाख की पैनाल्टी : सुप्रीम कोर्ट ने ई-वे बिल में पता गलत लिखने पर 22 लाख रुपए की पैनाल्टी लगाने के मामले में वाणिज्यिक कर विभाग की याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति डीवाय चंद्रचूड़ व जस्टिस बीवी नागरत्ना की युगलपीठ ने इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्णय को बहाल रखा है। इससे अब याचिकाकर्ता को पैनाल्टी के रूप में केवल एक हजार रुपये देने होंगे।

उल्लेखनीय है कि कटनी में टनल बोरिंग का काम रही कंपनी ने अमेरिका से पार्टस मंगाए थे। मुंबई में कस्टम से पास होने के बाद ई-वे बिल मुंबई से कटनी के लिए जारी होना था, लेकिन ई-वे बिल में मुुंबई से मुंबई लिख गया। बिल में मुंबई से कटनी की दूरी 1200 किमी लिखी गई थी। विभाग ने इस मामले में 22 लाख रुपये की पैनाल्टी लगा दी। अधिवक्ता अभिषेक ध्यानी के तर्क सुनने के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 22 लाख की पैनाल्टी को एक हजार रुपये में बदल दिया था। हाई कोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय को बहाल रखते हुए वाणिज्यिक कर विभाग की याचिका खारिज कर दी है।

Posted By: Ravindra Suhane

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