जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि नगर निगम, जबलपुर तीन सप्ताह का नोटिस देकर अवैध कब्जाधारियों से लेमा गार्डन को मुक्त कराए। इस बीच नगर निगम अपने संकल्प के अनुरूप लाटरी पद्धति से आवंटन की प्रक्रिया को गति देने स्वतंत्र है।

यदि अवैध कब्जाधारी तीन सप्ताह के नोटिस के बावजूद स्वयं पहल करके आवास खाली न करें, तो फिर उन्हें बलपूर्वक बाहर किया जा सकता है। न्याययायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ ने जबलपुर निवासी मोहम्मद वाजिद सहित अन्य की याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद पिछले दिनों अपना आदेश सुरिक्षत कर लिया था। इससे पूर्व याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा, वरुण तन्खा, शिवेंद्र पांडे, याज्ञवल्क शुक्ला ने पक्ष रखा था। जबकि राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली खड़े हुए। जबकि नगर निगम, जबलपुर का पक्ष अधिवक्ता अर्पण जे पवार ने रखा।

करीब के झुग्गीवासी जबरन कब्जाधारक बने : राज्य व नगर निगम की ओर से साफ किया गया कि लेमा गार्डन जबलपुर का बड़ा इलाका है। इसमें राजीव आवास योजना के तहत 434 यूनिट आवास निर्माण के अंतिम चरण में हैं। इससे पहले कि निर्माण पूरा होने के बाद विधिवत आवंटन प्रक्रिया को गति दी जाती, करीब के झुग्गीवासी अवैध कब्जाधारक बन गए। इन याचिकाकर्ताओं के पास किसी तरह का कोई वैधानिक आवंटन-पत्र नहीं है। इसीलिए नगर निगम, जबलपुर से एक सप्ताह के भीतर आवास खाली करने का नोटिस भेजा था। जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। इनके द्वारा कोविड संकट के समय किसी को बेदखल न करने संबंधी अंतरिम राहत का दुरुपयोग किया गया है।

Posted By: Ravindra Suhane

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