जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि सेवानिवृत्ति के बाद वसूली अनुचित है। इसी के साथ याचिकाकर्ता के हक में राहतकारी आदेश पारित कर दिया। कोर्ट ने पूर्व न्यायदृष्टांतों को अहमियत देते हुए अपना मत व्यक्त किया। इसके तहत शासकीय लापरवाही का खामियाजा सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी को भोगने विवश करने को ठीक नहीं माना।मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त सहायक यंत्री से ब्याज के रूप में वसूले गए दो लाख 37 हजार 344 रुपये एक माह में वापस करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ ने राज्य सरकार और सिंचाई विभाग को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब-तलब किया है।

रीवा जिले से सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अरुण कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि वह 31 मई 2021 को सेवानिवृत्त हुए है। सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग ने उनके सेवानिवृत्ति लाभों से सात लाख 18 हजार 242 रुपये की वसूली कर ली गई। इसमें दो लाख 37 हजार 344 रुपये ब्याज के रूप में वसूले गए। वसूली आदेश में कहा गया कि 20 वर्ष पूर्व उनके वेतन निर्धारण में गलती होने से उन्हें अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। अधिवक्ता स्वप्निल सौहगोरा ने दलील दी कि वेतन निर्धारण के लिए सहायक यंत्री जिम्मेदार नहीं है। अतिरिक्त भुगतान की गई राशि को उसके सेवानिवृत्ति लाभों से वसूल नहीं किया जा सकता है। सुनवाई के बाद एकल पीठ ने ब्याज के रूप में वसूली गई राशि एक माह में वापस करने का आदेश दिया है।

Posted By: Ravindra Suhane

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