जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने एक आदेश में साफ किया कि नियमानुसार जारी नहीं किया गया स्थानांतरण आदेश स्वयं ही निरस्त होने योग्य है। ऐसा करके जिम्मेदार अमले शासकीय दिशा-निर्देश का मजाक बनाते हैं। याचिकाकर्ता को जबरन परेशान किया गया है। इससे उसकी मानसिक शांति भंग हुई है। लिहाजा, नए सिरे से पुनर्विचार आवश्यक है। जब तक यह प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती, याचिकाकर्ता को मौजूदा जगह पर ही कार्य करने दिया जाए। उसके खिलाफ अनुचित स्थानांतरण आदेश को न मानने के आधार पर किसी तरह की कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।

ट्रांसफर आर्डर स्वमेव निष्प्रभावी : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि नियमानुसार शिक्षा मित्र पोर्टल के जरिये जारी नहीं किया गया ट्रांसफर आर्डर स्वमेव निष्प्रभावी हो गया है। लिहाजा, याचिकाकर्ता को मौजूदा स्कूल में ही कार्यरत रखा जाए। न्यायमूर्ति संजय दि्वेदी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता सतना निवासी रण विजय प्रताप सिंह की ओर से अधिवक्ता सुधा गौतम ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि 12 जुलाई, 2021 को राज्य शासन द्वारा जारी नीति के तहत ट्रांसफर आर्डर शिक्षा मित्र पोर्टल के जरिये ही जारी करने का प्रविधान किया गया था। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को सीधे आदेश जारी कर शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला रौड, सतना से शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, टीकर, रीवा भेजे जाने की व्यवस्था दे दी गई। याचिकाकर्ता ने मनमाने तरीके से हुए इस स्थानांतरण आदेश के खिलाफ आवेदन किया। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसीलिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि याचिकाकर्ता ने दूसरी स्कूल में ज्वाइनिंग न दी हो, तो उसे मौजूदा स्कूल में कार्यरत रखा जाए।

Posted By: Brajesh Shukla

NaiDunia Local
NaiDunia Local