जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सार्वजनिक भूमि पर एक निर्वाचित प्रतिनिधि के अतिक्रमण को गम्भीरता से लिया गया। कोर्ट ने साफ किया कि जिम्मेदार अधिकारी दूसरे अधिकारियों की सहायता से समस्या हल करें। बिना विलम्ब के कार्रवाई सुनिश्चित करें। इससे पूर्व निर्धारित नियम का पालन करें।

जनहित याचिकाकर्ता आदेश की प्रति के साथ अभ्यावेदन दे। उसे संज्ञान में लिया जाए और फिर आगे की प्रक्रिया को गति दी जाए। किसी तरह की कोताही हर्गिज न बरती जाए। आमजनों को हो रही असुविधा को हल्के में न लिया जाए।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका का इस निर्देश के साथ पटाक्षेप कर दिया कि पार्षद द्वारा रोड पर किए गए अतिक्रमण को हटाया जाए। इसके लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस सत्येंद्र कुमार सिंह की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता लाला हरदौल शिक्षण एवं सामाजिक संस्थान, पटेरा, दमोह की ओर से अधिवक्ता जयंत प्रकाश पटेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पार्षद योगेश उपाध्याय ने सार्वजनिक रोड पर अतिक्रमण कर लिया है। इस वजह से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसीलिए जनहित याचिका दायर की गई।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाए। कोर्ट ने पूरा मामला समझने के बाद निर्देश के साथ जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। इसी के साथ जनहित याचिका कर्ता ने राहत की सांस ली। वह लंबे समय से इसी तरह के आदेश की प्रतीक्षा में था।

Posted By: Ravindra Suhane

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