जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट ने जबलपुर विकास प्राधिकरण की टिंबर काम्प्लेक्स की स्कीम को डीनोटिफाई करने के मामले में सख्ती बरतते हुए 15 दिन के भीतर हर हाल में कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा न किए जाने की सूरत में आगामी सुनवाई तिथि 13 दिसंबर को नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने तैयार रहने की हिदायत दी गई है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य शासन की ओर से कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के लिए तीन माह की मोहलत दिए जाने पर बल दिया गया। लेकिन कोर्ट ने यह मांग नामंजूर कर दी।

याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी बंशीधर बड़गइयां की ओर से अधिवक्ता अतुल उपाध्याय ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि जेडीए ने 1984 में परसवाड़ा में टिंबर काम्प्लेक्स बनाने की एक स्कीम लांच की थी। इसके लिए याचिकाकर्ता सहित कई लोगों से 2006 में एग्रीमेंट के जरिए जमीन अधिग्रहण की गई थी। इसके तहत 20 प्रतिशत विकसित प्लाट देने का करार भी किया गया था। लंबे समय तक स्कीम के तहत कोई काम नहीं हुआ। मामले पर सुनवाई के दौरान जेडीए की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने बताया गया कि अब स्कीम लैप्स हो गई है। उन्होंने कहा कि जेडीए जमीन (जिसका मुआवजा दिया जा चुका है उसे छोड़कर) वापस करने तैयार है। जेडीए ने स्कीम डीनोटिफाई करने राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा है जो लंबित है। वहीं सरकार की ओर से बताया गया कि संचालक नगरीय प्रशासन के माध्यम से मंत्रालय को 22 अगस्त, 2022 को प्राप्त हुआ है। राज्य शासन की ओर से जानकारी दी गई कि नवंबर माह में विभाग के प्रमुख सचिव का स्थानांतरण हो गया है। लिहाजा, कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के लिए तीन माह की मोहलत दी जाए।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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