जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि । दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के पहले मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नर्मदा जल में प्रदूषण की स्थिति का आंकलन करने जांच नमूने एकत्र कर लिए है। ए ग्रेड वाली नर्मदा नदी में प्रतिमा विर्सजन से प्रदूषण न फैले इसके लिए प्रशासन ने नियम बनाए है जिसके लिए अलग-अलग जगह प्रतिमा विसर्जन कुंड बनाए गए हैंं। इन कुछ में विसर्जन के लिए पर्याप्त इंतजाम भी है।

मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अरूण जैन ने बताया कि सभी निकायों को हिदायत दी गई है कि नदियों में प्रदूषण न हो। इसके लिए अलग से सुरक्षा इंतजाम किए जाए। प्रतिमा विसर्जन के साथ उसमें पूजन सामग्री का विसर्जन भी नदियों में कर दिया जाता है जिस वजह से पानी में प्रदूषण फैलता है।

जांच अधिकारी विसर्जन के हफ्तेभर पहले और विसर्जन के एक दिन पूर्व,विजर्सन के दिन और उसके एक दिन बाद के जांच नमूने एकत्र करते हैं। जबलपुर के अलावा डिंडौरी, मंडला, नरसिंहपुर क्षेत्र से भी जांच नमूने जुटाएं जाते हैंं अभी इन इलाकों में नर्मदा नदी के पानी की गुणवत्ता बेहतर है।

बोर्ड की जांच के आधार पर इसे ए श्रेणी में शामिल किया गया है। बता दे कि इसके आगे होशंगाबाद जिले से आगे कुछ घाट पर जांच में नर्मदा नदी के पानी में प्रदूषण अधिक मिला है जिस वजह से उसे बी श्रेणी में रखा गया है। बोर्ड के अधिकारी डॉ.अरूण जैन ने कहा कि पूजन सामग्री और प्रतिमा के विजर्सन के बाद उसकी मिट्टी को भी कुंड से निकालकर अलग करना चाहिए ताकि प्रदूषण न फैले। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि नदी और तालाब को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए जरूरी है कि पूजन सामग्री का विसर्जन न करे। पूजन सामग्री पानी में छोड़ने की बजाए उसे किनारे पर एक सुरिक्षत स्थान पर रख दे ताकि उसे उठाया जा सके।

Posted By: Ravindra Suhane

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