जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। एमपी स्टेट बार काैंसिल के विशेष निर्देश पर फोटोयुक्त मतदाता सूची बनाने का कार्य जोरों पर है। स्क्रूटनी कमेटी अपने काम में जुट गई है। वकीलों से उनकी च्वाइस पूछी जा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाई कोर्ट या जिला बार, दो में से एक में ही मतदाता बना जा सकता है। अब तक कई वकील दोनों बार के मतदाता रहे हैं। लेकिन अब दोनों बार की मतदाता संख्या को पृथक-पृथक किया जा रहा है। इस वजह से आपत्तियाें की भी भरमार हो गई है। कई नाम उस जगह नहीं हैं, जहां वकील अधिकतम पैरवी करता है। ऐसे में आपत्तियों व दावों का निराकरण सिरदर्द बन गया है। वकील परेशान हो रहे हैं और परेशान कर रहे हैं। इससे स्क्रूटनी कमेटी का कार्य समय-सीमा के भीतर संपन्न होेने के आसार कम हो गए हैं।

माना जा रहा है कि वरिष्ठों के हस्तक्षेप के बिना यह समस्या निर्मूल नहीं होगी। स्टेट बार सदस्यों से भी हस्तक्षेप की आशा बांध ली गई है। ऐसे में एक संयुक्त बैठक की भी आवश्यकता महसूस हो रही है। स्टेट बार ने प्रदेश स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में सभी अधिवक्ता संघों की परेशानी कमोवेश एक समान है। इसका हल राज्य स्तर पर निकालना होगा। अधिवक्ता संघ वकीलों की सामुदायिक एकता के प्रतीक होते हैं। ऐसे में एकता भंग न हो, इसके लिए वकीलों की मांग को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वाकई जिन वकीलों की दोनों अदालतों में समान पैरवी है, उनको दोनों बार की सदस्यता हासिल है, तो वे मतदाता दोनों जगह के हो सकते हैं। डेमोक्रेटिक लायर्स फोरम के सचिव अधिवक्ता रविंद्र गुप्ता का यही मत है।

Posted By: Ravindra Suhane

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