सुरेन्द्र दुबे, जबलपुर। मुंबई के बॉलीवुड को टक्कर देने नोएडा के पास उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित फ़िल्म सिटी की तरह मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर भी एक और फ़िल्म सिटी बनने के लिए सर्वगुण संपन्न शहर है। दरअसल, जबलपुर और हिंदी सिनेमा का नाता बहुत पुराना है। इस शहर ने कई-कई तरह से सिनेमा का श्रृंगार किया। इस इन्द्रधनुषी योगदान में सिनेमा की कहानी से लेकर संगीत, अभिनय, निर्देशन और निर्माण सहित तमाम रंग बखूबी समाए हुए हैं। जबलपुर और आसपास के क्षेत्र में बेहतरीन शूटिंग लोकेशन की कोई कमी नहीं है। यहां सौंदर्य की नदी नर्मदा संसार के सबसे सुंदरतम स्थल संगरमरी भेड़ाघाट व धुंआधार को गोद में बसाए कल-कल प्रवाहित है। लिहाजा, जबलपुर जॉलीवुड या फिल्म सिटी बनने के लिए सर्वगुण सम्पन्न शहर है। यहां फिल्म शूटिंग-सर्किट विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। बस, जबलपुर को लाइट, साउंड, रोल कैमरा एंड एक्शन मोड में पहुंचाने भर की देर है।

जया भादुड़ी को यहीं से लगा अभिनय का चस्का : हिन्दी सिनेमा के महानायक अभिताभ बच्चन की धर्मपत्नी जाने-माने पत्रकार तरुण कुमार भादुड़ी की सुपुत्री जया भादुड़ी की जन्मस्थली जबलपुर ही है। जया भादुड़ी को स्कूल के जमाने में यहीं से अभिनय का शौक परवान चढ़ा और अंतत: वे हिन्दी सिनेमा की विख्यात अदाकारा बन गईं।

रघुवीर रहे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, विवेक ने भूतनाथ में अभिताभ को डायरेक्ट किया : दादामुनि अशोक कुमार जबलपुर के रॉबर्टसन कॉलेज से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद हिन्दी सिनेमा के कालजयी हस्ताक्षर बने। आगे चलकर फिल्म 'मैसी साहब के लिए रघुवीर यादव ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अर्जित किया, जो जबलपुर के रांझी क्षेत्र के निवासी थे। उन्होंने छोटे पर्दे पर मुंगेरीलाल जैसा कैरेक्टर प्ले कर सबको खूब हंसाया। वहीं जबलपुर में ऑकेस्ट्रा के ड्रमिस्ट बतौर शुरुआत करने वाले आदेश श्रीवास्तव ने अपनी लगन और प्रतिभा के बूते कई हिन्दी फिल्मों को अपने सुरीले संगीत से सजाने का सपना साकार कर दिखाया। जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से मुंबई पहुंचे शरद सक्सेना खलनायिकी की दुनिया में छा गए। जबलपुर के नयागांव निवासी अर्जुन रामपाल भी अच्छे अभिनेता हैं। वहीं जबलपुर से मुंबई पहुंचे युवा निर्देशक विवेक शर्मा ने भूतनाथ में अभिताभ बच्चन को डायरेक्ट करके अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

याकूब ने सबसे पहले दी मुंबई में दस्तक : जबलपुर से जिस शख्स ने सबसे पहले मायानगरी मुंबई में दस्तक दी, उसका नाम याकूब था। श्वेत-श्याम फिल्मों में अक्सर बरछी भांजने के दृश्यों में याकूब को देखा जा सकता है। वे जबलपुर के गोहलपुर क्षेत्र में निवास के दौरान एक डॉक्टर की डिस्पेंसरी के बाहर दवा की खाली शीशी बेचा करते थे, उन्हें सिनेमा ने आकर्षित किया और वे सीधे मुंबई पहुंच गए। उनके बाद जबलपुर से मुंबई पहुंचे एक बानबूट ने भी सिनेमा में हुनर दिखाया। इसी कड़ी में सीएस दुबे जैसे मंजे हुए कलाकार जबलपुर से मुंबई पहुंचे और कई फिल्मों में जीवंत अभिनय किया। जबलपुर के करुणाकर पाठक महाभारत में शिशुपाल की भूमिका में उतरे। वहीं बीके तिवारी कई फिल्मों व टीवी सीरियल में नजर आकर नाम रोशन कर रहे हैं।

प्रेमनाथ ने बहनोई राजकपूर को कराया जबलपुर-दर्शन : 50 के दशक में जबलपुर से मुंबई पहुंचे प्रेमनाथ ने हिन्दी सिनेमा को अपने दमदार अभिनय से नई ऊंचाई पर पहुंचाया। उनकी बहन कृष्णा का विवाह हिन्दी सिनेमा के ग्रेट शोमैन राजकपूर से हुआ। जिसके बाद वे राजकपूर को जबलपुर-दर्शन कराने लाए। इस दौरान नर्मदा के सौंदर्य को देखकर राजकपूर दंग रह गए थे। आगे चलकर प्रेमनाथ ने जबलपुर को एम्पायर थ्रियेटर की सौगात भी दी, जिसका लोकार्पण पृथ्वीराज कपूर ने किया था। इसमें पहली फिल्म 'बादल प्रदर्शित हुई थी। प्रेमनाथ के एक भाई राजेन्द्र नाथ कॉमेडियन तो दूसरे नरेंद्र नाथ चरित्र अभिनेता बने। वहीं बेटे प्रेमकिशन-मोंटी भी फिल्मों में आए।

साठिया कुंआ के समीप था रहमान का निवास : साहब, बीबी और गुलाम सहित कई फिल्मों में अलहदा अभिनय का कमाल दिखा चुके अभिनेता रहमान का निवास जबलपुर में साठिया कुंआ के समीप था। रंगमंच में अभिरुचि उन्हें मुंबई खींचकर ले गई और अंतत: वे हिन्दी सिनेमा में अपनी छाप छोड़ने में सफल हुए। अभिनेता नरोत्तम बेन, उदय सिंह बघेल, नेहा सराफ, सारिका नायक, राणा प्रताप सेंगर, कपिल श्रीवास्तव, सूरज नागोत्रा, राम मिश्रा, शची केसरी, राहुल शांकल्ये, नीरज सिंह राजपूत के नाम भी उल्लेखनीय हैं। इसी तरह जबलपुर के करण मिश्रेकर ने फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में नाम कमाया है।

सुनील नन्होरिया की कहानी पर बनी राजकपूर की फिल्म बूट पॉलिश : जबलपुर निवासी सुनील नन्होरिया की लिखी कहानी राजकपूर को इतनी पसंद आई कि उन्होंने उसकी पटकथा तैयार करवा कर 'बूट पॉलिश फिल्म बना दी। यह फिल्म बेहद सफल रही। इसी के साथ सिनेमा की कथा लिखने के क्षेत्र में भी जबलपुर का योगदान हो गया। इसी कड़ी में जबलपुर के रवि बुले आखेट जैसी बेहतरीन फिल्म के जरिए मायनगरी में अपनी छाप छोड़ चुके हैं।

रितिक रोशन की ननिहाल है जबलपुर : राकेश रोशन के सुपुत्र अभिनेता रितिक रोशन की ननिहाल जबलपुर ही है। यहां बचपन में रितिक गलियों में घूमा करते थे और लोग उन्हें प्यार से डुग्गू कहकर पुकारते थे। सिनेमा के बड़े नाम जे.ओमप्रकाश व जबलपुर के डॉ.अशोक परिवार की यादें इस सबसे गहरी जुड़ी हुई हैं। निर्माता-निर्देशक विमल कुमार, अमरीष संगल व दीपक सरीन भी जबलपुर से ही हैं।

शाहरुख खान को लेकर फिल्म गुड्डू बनाई : फिल्म निर्माता-निर्देशक राजकुमार संतोषी का गृहनगर भी जबलपुर ही है। शाहरुख खान की फिल्म गुड्डू का निर्देशन जबलपुर के प्रेमचंद लालवानी ने किया था।

इनका भी योगदान : आजादी के पहले सेठ गोविन्ददास परिवार के मार्गदर्शन में पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र ने भी फिल्म निर्माण के क्षेत्र में दस्तक दी थी। धुंआधार नामक फिल्म महाकोशल पिक्चर्स लिमिटेड के बैनर तले बननी शुरू हुई थी। कालांतर में मोरो बेटो-मोरो लाल (रम्मू नायक), मछली जल की रानी (जैन), चौसर फिरंगी (सिद्धार्थ यादव), स्ट्रगलर (मयंक तिवारी), बेरोजगार लीडर (पीतम सोंधिया), वेब सीरीज अराजक और सुराग (अमित चौधरी) जैसे क्रियेशन सामने आए। जबलपुर में फिल्म संस्था एमपीएफए का आरिफ खान-वीरू पवार द्वारा गठन किया गया।। जबलपुर से अभिनेता योगी सिंह, अभिनेत्री शालिनी पांडे, दिवंगना सूर्यवंशी, गायक अभिजीत भट्टाचार्य, आभास जोशी व गायिका सारेगमप फेम इशिता विश्वकर्मा सहित अन्य भी उल्लेखनीय हैं।

इन्होंने जबलपुर के मंचों पर किया अभिनय : जबलपुर के मंचों पर कादर खान, टॉम आल्टर, कंगना रानाउत, विवेक ओबेरॉय, यशपाल शर्मा, नीना गुप्ता, आशीष विद्यार्थी, बैंडिट क्वीन फेम सीमा बिस्वास, कॉमेडियन हेमंत पांडे, भाभी जी घर पर हैं फेम विभूति नारायण उर्फ आसिफ शेख व नीतू चन्द्रा सहित अन्य देश के जाने-माने अभिनेता अभिनय का लोहा मनवा चुके हैं। जबलपुर के शाश्वत कौरव ने बाहुबली जैसी सुपरहिट फिल्म में अपने तकनीकी कौशल का कमाल दिखाया। वहीं अभिनेता अमित परनामी गैंग्स ऑफ गुडगांव सहित कई फिल्मों में नजर आ चुके हैं।

कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी : जिस देश में गंगा बहती है, प्राण जाए पर वचन न जाए, गंगा की सौगंध, अशोका दि ग्रेट, मैरिड टू अमेरिका, मोहनजोदाड़ो व द रिबेलियस फ्लॉवर सहित कई फिल्मों की यहां शूटिंग हुई। गुजरे जमाने की अदाकारा बैजयंती माला से लेकर नए जमाने की अभिनेत्री करीना कपूर तक यहां शूटिंग के दौरान फिल्मी गानों पर थिरक चुकी हैं। राजकपूर, प्रेमनाथ, प्राण, सुनील दत्त, डिंपल कपाड़िया, शाहरुख खान, रितिक रोशन, जैकी श्रॉप सहित अन्य को जबलपुर की शूटिंग लोकेशन बेहद भा चुकी हैं। प्रकाश झा और आशुतोष गोवरीकर जैसे दिग्गज निर्माता-निर्देशक जबलपुर का सौंदर्य देखकर दंग रह गए थे। सुभाष घई दो बार जबलपुर आए और दोनों बार नर्मदा दर्शन के बाद जबलपुर की प्रशंसा करते थके नहीं।

कभी सिनेमाघरों की कमी नहीं रही : एक जमाने में जबलपुर में ज्योति, कृष्णा, आनंद, नवनीत, पायल, विनीत, जयंती, पंचशील, डिलाइट, एम्पायर, प्रभु-वंदना, श्याम, सुभाष, शीला, कल्पना और लक्ष्मी टॉकीज हुआ करती थीं, जो अब बंद हो चुकी हैं। लेकिन शारदा टॉकीज बंद होने के बाद फिर शुरू हो गई है। इसके अलावा सिविक सेंटर व ग्वारीघाट में कई स्क्रीन वाले मल्टीप्लेक्स सिनेमा-दर्शन के लिए खुले हुए हैं। कुल मिलाकर जबलपुर की तरफ नज़र इनायत हो तो नोयडा में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश की नई फिल्म इंडस्ट्री के साथ मध्य प्रदेश की फिल्म इंडस्ट्री भी धूम मचा सकती है।

Posted By: Ravindra Suhane

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