जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट में नगर पालिका, दमोह की ओर से भरोसा दिलाया गया कि अवैध होर्डिंग के विरुद्ध शीघ्र ही कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने इस आशय के अभिवचन को रिकार्ड पर लेकर जनहित याचिका का पटाक्षेप कर दिया। इसके साथ ही जनहित याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दे दी कि यदि नगर पालिका की कार्रवाई संतोषजनक न पाई जाए तो नए सिरे से हाई कोर्ट की शरण ली जा सकेगी।

जनहित याचिकाकर्ता दमोह निवासी अनुराग हजारी की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि दमोह शहर के अंदर अवैध होर्डिंग की भरमार है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व आदेश के पालन में राज्य शासन ने होर्डिंग नियम-2016 बनाए हैं। साथ ही राज्य के सभी कलेक्टरों को सख्त हिदायत दी है कि अवैध होर्डिंग्स पर कड़ाई से कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ता ने नगर पालिका दमोह एवं कलेक्टर एवं सभी अधिकारियों को 2019 से लेकर लगातार शिकायत की, किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस तरह का रवैया न केवल हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना है, बल्कि होर्डिंग नियम व मोटर व्हीकल अधिनियम के प्रविधानों का खुला उल्लंघन भी है। जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने मध्यप्रदेश शासन, नगरीय प्रशासन विभाग, दमोह कलेक्टर एवं नगर पालिका को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। नोटिस के जवाब में दमोह नगर पालिका की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने होर्डिंग हटाने का अभिवचन प्रस्तुत कर दिया। जिस पर गौर करने के बाद मामले का निराकरण कर दिया गया।

दुर्घटना दावा मामले में फ्लेट इनकम टैक्स की कटौती नहीं की जा सकती

जबलपुर। हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि दुर्घटना दावा का अवार्ड पारित करते समय फ्लेट इनकम टैक्स की कटौती नहीं की जा सकती। इतना ही नहीं मुआवजा मृतक की कुल आय के आधार पर तय करना होता है। इस मत के साथ न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने दुर्घटना दावा अधिकरण रीवा द्वारा तय मुआवजा में एक करोड़ 51 लाख 18 हजार 386 रुपये का इजाफा किया। प्रकरण के अनुसार रिलायंस कंपनी में प्रबंधक के पद पर पदस्थ राम ओमर की 11 फरवरी, 2015 में सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। उस समय मृतक की उम्र मात्र 29 वर्ष थी। दुर्घटना दावा अधिकरण रीवा की अदालत ने 57 लाख 95 हजार 260 रुपये का अवार्ड पारित किया था। इसके खिलाफ मृतक की पत्नी मयंकाराम ओमर, बेटी ऐंद्री, पिता प्रदीप और मां नीलम ने हाई कोर्ट में अपील प्रस्तुत की। अपीलार्थियों की ओर से अधिवक्ता कपिल पटवर्धन ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अधिकरण ने मृतक की कुल आय से परिवार को मिलने वाले लाभ, पर्क्स व एलाउंस की कटौती करने के बाद मुआवजा का निर्धारण किया। इसके अलावा इनकम टैक्स की कटौती फ्लेट 30 प्रतिशत के हिसाब से की गई।

Posted By: Jitendra Richhariya

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