जबलपुर। ''संसार में वैसे तो कोई चीज मुफ्त में नहीं मिलती, लेकिन सलाह एक ऐसी चीज है जो मुफ्त मिलती है, एक मांगों कई मिलती हैं और उन सलाहों में काम की बात बहुत कम होती है। मनुष्य का जीवन एक संघर्ष है, जीवन के प्रत्येक पड़ाव में विभिन्ना परिस्थितियों व समस्याओं का सामना करना होता है। जिसका समाधान वह अपने आसपास के व्यक्तियों की सलाह, परामर्श व विचार विमर्श से करता है। इस प्रक्रिया में वह अपने आपको कभी सफल व कभी असफल पाता है। सामान्यतया हम समाज में यह देखते हैं कि लोग परेशानियों में साथ दें अथवा न दें लेकिन सलाह देने में आगे रहते हैं।

व्यक्ति को सलाह की जरूरत कब होती है? मनुष्य जहां शंकित होता है, परेशानी में घिर जाता है, उसे समझ नहीं आता है कि वह क्या करे और क्या न करे। सारी परिस्थितियां विपरीत हों, तब मनुष्य को सही सलाह और सहयोग की जरूरत पड़ती हैं। जो उसकी स्थिति को समझ सके, सही और उचित मार्गदर्शन दे सके। समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता है कि हमारा सलाहकार कौन है ये काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुर्योधन शकुनि से सलाह लेता था और अर्जुन श्री कृष्ण से।

सलाह हमेशा उन लोगों से होना चाहिए, जिन्होंने कड़ी मेहनत करते हुए अपने लक्ष्य प्राप्त किए हों। डा. पदमराज जी महाराज ने जीवन में सलाहकार का महत्व बताते हुए कहा कि प्रथम यह जानना जरूरी है कि आपके सलाहकार विभीषण एवं मंदोदरी जैसे हैं अथवा मंथरा जैसे। हमारे सलाहकार की भूमिका हमारे जीवन में शिक्षक से भी अधिक महत्वपूर्ण है।

ज्ञानवान, गुरुजनों, माता पिता की सही सलाह जीवन में सहायक होती है, जो रास्ता भटकने से बचाती है। एक उत्तम कोटि का साहित्य भी अच्छा सलाहकार सबित होता है, जो कि व्यक्ति को सही विकल्पों के चयन में सहायक सिद्ध होता है। अनुभवी मनुष्य ही अच्छी सलाह दे सकते हैं। जो मनुष्य उस बात से गुजरा ही नहीं वो कैसे समझ सकता है और सही सलाह दे सकता है। सही सलाह मनुष्य के भविष्य निर्माण में दीपक का काम करती है, जो अंधेरे में रोशनी दिखाती है। सलाह बर्फ की तरह होती है, यह जितनी मृदुता के साथ दी जाती है उतनी ही अधिक समय तक ठहरती है तथा उतनी ही गहराई तक मस्तिष्क में प्रवेश करती है।

मनुष्य की अंतरात्मा जो सत्य महसूस करती है, वह सही होती है। बिना जाने समझे यूं ही दूसरों की सलाह पर अमल नहीं करना चाहिए। मनुष्य जितना अच्छा सलाहकार स्वयं के लिए होता है, अन्य कोई नहीं हो पाता है, क्योंकि मनुष्य अपने बारे में अपनी सोच, क्षमता, गुण, अवगुण, कमी, खूबी आदि से वाकिफ होता है, खुद को अच्छी सलाह दे सकता है।-मुकेश श्रीवास्तव, प्राचार्य, शासकीय हाईस्कूल कालाडूमर पनागर

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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