जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले में दलाल सक्रिय थे। सेन्ट्रल इंडिया किडनी अस्पताल में दलालों के जरिए आयुष्मान योजना के हितग्राही आते थे और बिल की रकम में कमीशन दलालों को मिलता था। अस्पताल संचालक डा. दुहिता पाठक और उसके पति डा. अश्वनी पाठक से एसआइटी द्वारा जेल में पूछताछ की गई थी। इस दौरान डाक्टर ने कई और दलालो के नामों का खुलासा किया था। एक महिला दलाल को आरोपी बनाने के बाद एसआईटी ने अन्य तीन दलालों की जानकारी जुटा रही है। जानकारी के अनुसार जेल में बंद डाक्टर ने पूछताछ और जांच के दौरान बताया कि कि दो दलाल सगे भाई हैं। उन्हें मिश्रा के नाम से पूरे अस्पताल में जाना जाता था, वहीं एक अन्य दलाल अयाज मंसूरी था। नामों का खुलासा होने के बाद टीम ने तीनों के घरों पर दबिश दी, लेकिन वे नहीं मिले। एसआइटी के मुताबिक तीनों दलालों को पांच से दस लाख रुपये तक कमीशन अस्पताल के द्वारा दिया गया।

एसआईटी को मिली जानकारी के मुताबिक उक्त तीनों दलालों की पैठ शहर के अलावा ग्रामीण अंचल में थी। वे पहले ऐसे लोगों को तलाशते, जो आर्थिक रूप से कमजोर है। उन्हें बातों में फंसाते और रुपये का लालच देते। जिसके बाद ये तीनों दलाल उक्त लोगों के दस्तावेज लेकर अस्पताल पहुंचते। जैसे ही अस्पताल से पता चलता कि वे आयुष्मान योजना के हितग्राही हैं, तो दलाल उक्त हितग्राहियों को सीधे अस्पताल में लाकर भर्ती करा देते थे। जिसके बाद अस्पताल में ही उक्त हितग्राहियों के कार्ड बनते और फिर उन्हें गंभीर बीमार बताकर शासन से रुपये वसूलते। मामले में एसआईटी ने महिला दलाल रईसा बेगम को आरोपी बनाया। उसके न मिल पाने पर उस पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया। पुलिस टीमें लगातार महिला दलाल के स्वजन और परिचितों से पूछताछ कर उसका पता लगाने का प्रयास कर रही है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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