जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। खेती में बढ़ते रासायनिक प्रयोगों से लागत व भूमि की उर्वरता पर विपरीत असर देखे जा रहे हैं। इसके निदान के लिए प्राकृतिक खेती की अवधारणा एक वरदान के रूप में सामने आ रही है। इसी को देखते हुए शहपुरा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम दुर्गापुर-चिरापोड़ी ग्राम पंचायत में आदिवासी-किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। कृषि विभाग की ओर से इस गांव को गोद लिया गया है।

दूरस्थ आदिवासी बाहुल्य ग्राम दुर्गापुर-चिरापोड़ी में क्योंकि बरगी बांध के विस्थापितों को बसाया गया है। बंजर भूमि होने की वजह से यहां की कृषि भूमि में उर्वरता बहुत कम रही है। इसी को देखते हुए कृषि विभाग ने इस ग्राम को गोद लेते हुए यहां पर प्राकृतिक खेती व गौ-आधारित कृषि पर विशेष जोर दिया है।

जैविक खाद बनाने का दिया प्रशिक्षण

कृषि विभाग की ओर से गए उप संचालक डा. एसके निगम ने ग्रामीणों को देसी गाय के गोबर, गोमूत्र को कुछ अन्य सामग्रियों के साथ मिलाकर घन-जीवामृत व संजीवनी-जल जैसी जैविक खाद बनाने के तरीके किसानों को सिखाए। स्थानीय प्रगतिशील कृषक श्याम तिवारी ने कृषकों की भूमि पर नाडेप व वर्मी कंपोस्ट एवं गोबर गैस की संरचनाएं किसानों के सहयोग से निर्मित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन की। आत्मा परियोजना के विकासखंड प्रभारी रोहित गुप्ता ने किसानों के समूह बनाए एवं उन समूहों को शासकीय योजना के अंतर्गत जैविक कृषि के उर्वरक उपलब्ध कराए। इस मोके पर किसानों को अरहर व उड़द के उन्नत बीज भी वितरित किए गए।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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