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जबलपुर। नईदुनिया रिपोर्टर

10 जनवरी,2020 में रिलीज होने वाली फिल्म 'छपाक' में शहर की रंगकर्मी अन्नपूर्णा सोनी भी अपने अभिनय की प्रतिभा दिखाने वाली हैं। अन्नपूर्णा ने फिल्म में दीपिका पादुकोण की साथी एक एसिड विक्टिम दीपा का रोल अदा किया है। फिल्म में दीपिका पादुकोण भी एक एसिड विक्टिम मालती के रूप में नजर आने वाली है। फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार ने किया है। फिल्म एक सच्ची कहानी पर आधारित है। गौरतलब है कि फिल्म दिल्ली की एसिड विक्टिम लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित है। आइए जानते हैं अन्नपूर्णा से उनके फिल्म 'छपाक' तक पहुंचने की कहानी।

ऑडिशन बना माध्यम

मुझे मुंबई में ढाई साल हो चुका है। इस बीच में कई शॉर्ट फिल्मों में काम किया। वेबसीरिज रंगबाज भी कर चुकी हूं, जिसमें अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। ऐसे ही एक बार एक ऑडिशन में गई तो पता चला कि छपाक के लिए ऑडिशन हो रहे हैं तो मेरे मुंह से निकल गया कि काश! मुझे इस फिल्म में काम करने मिल जाए। हुआ भी यही। ऑडिशन हुआ और मेरा सिलेक्शन हो गया। उसके बाद मुझे बताया गया कि मेघना गुलजार को मेरा ऑडिशन पसंद आया है तो मेरा सिलेक्शन हो गया। फिल्म की शूटिंग दिल्ली और मुंबई में हुई। इसमे मेरा शूट 12 से 13 दिन का था। मैं फिल्म में एक एसिड विक्टिम की भूमिका निभा रही हूं। जो मालती के एसिड विक्टिम ग्रुप में नई-नई शामिल हुई है और मालती से बहुत प्रभावित है।

दीपिका ने किया सपोर्ट

फिल्म में ऐसे कुछ सीन हैं जो मैंने दीपिका पादुकोण के साथ किए हैं। वैसे तो दीपिका स्टार हैं तो एक स्टार का जैसा रुतबा रहता है वैसा उनका भी है। लेकिन को-स्टार्स को वो सपोर्ट बहुत करती हैं। हम दोनों का मेकअप प्रोस्थेटिक था, तो गर्मी बहुत लगती थी। जहां ए सी रहता था तो वो मेरा भी ध्यान रखती थीं कि मुझ तक ए सी की हवा पहुंच रही है या नहीं। अच्छा लगता दीपिका के साथ काम करके।

कटनी के बरही में थिएटर पर काम

मैं मूलतः कटनी के पास बरही की रहने वाली हूं। स्कूलिंग बरही में हुई है। इसके बाद कॉलेज जबलपुर से किया और यहीं विवेचना रंगमंडल में अरुण पांडे दादा के निर्देशन में अभिनय की बारीकियां सीखीं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में चयन के बाद रेपर्टरी में काम किया। फिर मुंबई आ गई। लेकिन मैंने अपने गांव बरही में एक थिएटर ग्रुप-दर्पण बनाया है। जिसके अंतर्गत गांव के बच्चों को थिएटर से जोड़ा जा रहा है। जिसे मैंने शुरू किया और अब मेरा भाई दुर्गेश बखूबी चला रहा है। मेरे लिए थिएटर उसी तरह है जैसे एक घर या परिवार की अहमियत होती है। जब बहुत दिनों तक घर नहीं जाओ तो बैचेनी होती है न, ठीक वैसे ही मुझे बहुत दिनों तक थिएटर न करने के बाद महसूस होता है। मेरी इस उपलब्धि में मेरे माता-पिता और पति वासु का हमेशा सपोर्ट रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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