जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर के गोरखपुर क्षेत्र निवासी कामधेनु गोरक्षा राष्ट्रीय दल से संबंधित ब्रजेंद्र लक्ष्मी यादव की ओर से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसके जरिये राज्य की सड़कों पर भटकने वाले मवेशियों के लिए ठोस कदम उठाये जाने पर बल दिया गया है। जनहित याचिकाकर्ता का कहना है कि 12 नवंबर, 2019 को उसने तेंदूखेड़ा से दमोह के बीच करीब दो हजार गोवंश के मवेशियों का झुंड देखा, जिसे कुछ लोग हांक कर ले जा रहे थे। पूछने पर जानकारी मिली कि ग्वालियर जिले के श्योपुर से इन पशुओं को बालाघाट के व्यापार मेले में बेचने के लिए ले जाया जा रहा है।

याचिका में कहा गया कि जिस तरीके से श्योपुर से लगातार इतने बड़े झुंड में पैदल चलाते हुए इन पशुओं को ले जाया गया, वह पशुक्रूरता अधिनियम व गोवंश प्रतिषेध अधिनियमों के खिलाफ व अमानवीय है। इन पशुओं में से कई बीमार, घायल भी थे। पशुक्रूरता अधिनियम का हवाला देते हुए उन्होंने तेंदूखेड़ा पुलिस थाने में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबलपुर में हेड पोस्ट ऑफिस के समीप साउथ सिविल लाइन निवासी जागरूक युवती पूर्णिमा शर्मा ने 24 अक्टूबर, 2019 को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति को एक पत्र लिखा था। इसमें कहा गया कि विभिन्न हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं को सडक़ों पर विचरण करने से रोक ने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते इन मूक पशुओं पर स्थानीय निकाय के कर्मी क्रूरता करते हैं। कांजीहाउस, गोशालाओं मे किसी तरह की सुविधाएं नहीं हैं। यहां रखे गए मवेशियों की दशा अत्यंत दयनीय है। नगर निगम जबलपुर ने तिलवारा में गोसेवा केंद्र स्थापित किया है। लेकिन यहां भी लगभग एक हजार मवेशी हैं। इनके लिए यह जगह बहुत ही छोटी है। कांजीहाउस, गोशाला के मवेशियों के खाने,पीने, इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। रोजाना तिलवारा के गोसेवा केंद्र में पांच-दस असमय मवेशी काल के गाल में समा रहे हैं। निगम में इनके लिए डॉक्टर तक नहीं हैं। इसकी शिकायत सीएम हेल्प लाइन तक की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिछले दिनों दोनों मामलों की हाइकोर्ट में एक साथ सुनवाई हुई।

इस दौरान साफ किया गया कि गोवंश की तस्करी करने वालों से पुलिस की मिलीभगत है। व्यापार मेला के नाम पर ले जाए जाने वाले पशुओं की खरीद-फरोख्त का कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में गौवंश का बुरा हाल है। आए दिन सड़क पर आवारा भटकने वाले गोवंश के मवेशियों के कारण दुर्घटनाएं होती हैं। राज्य सरकार ने तीन हजार गोशालाओं के निर्माण की बात कही। लेकिन अभी तक अधिकांश का काम नहीं हुआ। सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को स्टेटस रिपोर्ट और एक्शन प्लान पेश करने का निर्देश दिया था।

Posted By: Ravindra Suhane

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