Curent Column in Jabalpur : आजादी के अमृत महोत्सव में सारा देश रोशनी से जगमग था। जिस पार्टी के शीर्ष नेता खुद इस उत्सव को भव्य बनाने के लिए रात-दिन एक कर रहे थे। उसी पार्टी का संभागीय मुख्यालय अमृत महोत्सव पर बेनूर नजर आया। संगठन ने सुबह झंडा वंदन तो किया लेकिन दफ्तर को सजाना संवारना भूल गए। तीन सितारा होटल की तरह आलीशान इस मुख्यालय को वैसे तो हर मौके पर सजाया संवारा जाता है लेकिन आजादी के उत्सव पर जब सड़क से कोई निकल रहा था तो दफ्तर में शाम के समय अंधेरा देखकर हैरान था। वहीं प्रदेश संगठन के नेता प्रदेश मुख्यालय को रोशनी से सराबोर किया गया था। कहते हैं कि पिछले दिनों नगर सरकार में मिली हार के सदमे में संगठन इस कदर गमगीन हुआ कि राष्ट्रीय उत्सव को भी मनाने की याद नहीं रही। हालांकि पार्टी के नेताओं ने उत्सव को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

नेताजी को छोड़ निकाली रैली

भाजपा ने हर विधानसभा में तिरंगा रैली निकाली। शीर्ष जनप्रतिनिधि रैली का आयोजन कर रहे थे, लिहाजा वो अगुवाई भी हर कहीं करते नजर आए। पाटन में जब यह रैली निकली तो नेताजी को लिए बगैर ही रैली आगे बढ़ गई। इस क्षेत्र के नेता की रैली करने वाले नेता के बीच लंबे समय से संबंध में खट्टापन बना हुआ है। दोनों ही एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं। ऐसे में क्षेत्र के नेता रैली में शामिल हुए। उनके साथ पर्यटन विभाग देखने वाले नेता भी थे। रैली का समय और स्थान पहले से तय था। इसके बावजूद रैली की अगुवाई करने वाले नेता के आने के पहले ही सैकड़ों की भीड़ को लेकर स्थानीय नेता रैली लेकर निकल पड़े। जब तब शीर्ष जनप्रतिनिधि स्थल पर पहुंचे तो उन्हें पता चला कि रैली शुरू हो गई है। यह बात नेताजी को खटक गई और वे बिना रैली बीच में ही छोड़कर लौट आए।

दावेदारी का दांव उल्टा न पड़ जाए

राजनीति में किसी वक्त भी उलटफेर होने की संभावना बनी रहती है। भाजपा के अंदर इसकी गुंजाइश अधिक होती है। इन दिनों नगर सत्ता में नेता प्रतिपक्ष के लिए पार्षदों में होड़ लगी है। पहले निगम अध्यक्ष के नाम पर कयासबाजी लग रही थी। नाम तय होने के बाद नेता प्रतिपक्ष के लिए गुणाभाग लगने लगा। पहले महापौर के दावेदार बने नेताजी को पार्षद की टिकट से ही संतोष करना पड़ा। उस समय पार्टी ने आगे बेहतर निर्णय का भरोसा दिया। अब पार्टी विपक्ष की भूमिका में है इसलिए नेताजी खुद को नेता प्रतिपक्ष के लिए योग्य मान रहे हैं। पार्टी के कई नेता उनके दावे से इत्तिफाक रखते हैं, लेकिन गुपचुप तरीके से दूसरे भी कतार में हैं। एक अनुभवी पार्षद को जबलपुर के प्रमुख नेता ने आशीर्वाद दिया है। कहते हैं कि दावेदार पार्षद की जीत से विरोधी परेशान है। इसलिए वे नेता प्रतिपक्ष बनाकर पार्षद का कद नहीं बढ़ाना चाहते हैं।

तबादला ही पड़ गया भारी

मप्र पावर जनरेशन में पन बिजली से जुड़े एक आला अफसर का तबादला अब प्रबंधन को खटक रहा है। पिछले दिनों चंबल अंचल से इन साहब को एक चिट्टी लिखने पर हटा दिया गया। साहब सिर्फ इकाई में काम करवाने पर आमादा थे जो कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही थी। कंपनी ने साहब को जिस दूसरी जगह पर भेजा है वहां भी खामियों का पुलिंदा खुलना शुरू हो गया है। पिछले दिनों इकाई ठप हो गई। इससे पहले भी यह मशीन बंद हुई थी, जिसे दो साल से ज्यादा समय बाद चालू किया जा सका। कंपनी ने जांच के लिए टीम भी भेजी। जो दो दिन प्लांट में घूमकर लौटी। नए साहब ने खामियों के पुराने खर्रे भी टीम को दिए हैं, जिसकी वजह से कई अफसरों की गर्दन नपने के संकेत मिल रहे हैं। इधर जांच के नाम पर लीपापोती करने का प्रयास भी हो रहा है।

Posted By: tarunendra chauhan

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close