जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की निंदा की है। महासभा के प्रदेशाध्यक्ष इंद्रकुमार पटेल ने जारी बयान में बताया कि पुलिस प्रशासन ने कोरोना गाइडलाइन का हवाला देकर सरकार के इशारे पर उनकी मांग दबाने अपना मनुवादी चेहरा दिखाया है। प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि सोमवार को सिविक सेंटर उद्यान में ओबीसी महासभा के आव्हान पर प्रदर्शन किया जा रहा था। जिसमें बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

महासभा द्वारा शिक्षक भर्ती में 27 फीसद आरक्षण लागू किए जाने, ओबीसी समाज के विद्यार्थियों की रोकी गई छात्रवृत्ति बहाल किए जाने सहित अन्य मांगों को लेकर सिविक सेंटर उद्यान में प्रदर्शन करने के बाद दाेपहर करीब तीन बजे कार्यकर्ता रैली की शक्ल में पैदल मार्च कर घंटाघर के पास मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन देने जा रहे थे। लेकिन इसी दौरान पुलिस ने शासन के इशारे पर उनके प्रदर्शन को कुचलने का प्रयास करते हुए बर्बरतापूर्वक लाठी चार्ज कर दिया। जिसमें सैकड़ों कार्यकर्ता घायल हुए। लाठी चार्ज की रामरतन यादव, घनश्याम यादव, बैजनाथ कुशवाहा, नोखेलाल कुशवाहा, रामकिशोर शिवहरे, राम सिंह पटेल, केशलाल रजक, रमेश रजक, नरेश बारी, संजय सेन, धनेश पटेल आदि ने निंदा की है।

प्रदेश भर से आए थे कार्यकर्ता: महासभा के राष्ट्रीय कोर समिति के सदस्य धर्मेंद कुशवाहा ने बताया कि महासभा के आव्हान पर ग्वालियर, रीवा सहित अन्य प्रदेश भर से पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए थे।

ये हैं मांगे-

- शिक्षक भर्ती में 27 फीसद आरक्षण लागू किया जाए।

- ओबीसी समाज के छात्र-छात्राओं की रोक कर रखी गई 1200 करोड़ की छात्रवृत्ति दी जाए।

- मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती में सभी विषयों के पदों के बढ़ोत्तरी की जाए।

-आदिवासी वन अधिकार कानून लागू किया जाए।

- ओबीसी और सामान्य वर्ग की जातिगत जनगणना कराई जाए।

Posted By: Ravindra Suhane

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