जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। देश के बिजली घरों में कोयले की कमी ने न सिर्फ सरकार का तनाव बढ़ाया बल्कि आम आदमी को भी चिंता में डाल दिया। लोगों को बिजली कटौती का डर सताने लगा। इस कमी को दूर करने के लिए रेलवे ने सबसे अहम भूमिका निभाई। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर, भोपाल और कोटा मंडल ने अपनी सीमा में बड़ी संख्या में मालगाडि़यों काे चलाया। यहां तक की यात्री ट्रेनों को रद करने और उन्हें रोककर मालगाडि़यों को रास्ता भी दिया गया, ताकि बिजली घरों में कोयले की कमी न हो। पमरे के मुताबिक बिजली घरों तक कोयला पहुंचाने में बड़े स्तर पर काम किया गया। 75 दिनों के दौरान लगभग तीन हजार मालगाडि़यों की मदद से कोयला पहुंचाया गया।

इस बार 2478 रैक ज्यादा दौड़ाए

श्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राहुल जयपुरिया ने बताया कि साल 2021-22 में 9993 रैक की मदद से कोयला पहुंचाया गया था। 2020-21 में 7515 रैक कोल अनलोडिंग हुई। यानि इस बार 2478 रैक ज्यादा चलाए गए। वहीं अप्रैल से 25 जून तक माल यातायात कोल की 3284 रैक अनलोडिंग की तो वहीं 255 रैक कोल लोडिंग की गई है। इसकी तुलना पिछले साल से की जाए तो माल यातायात कोल की 64 रैक लोडिंग की गई है, जो मात्र ढाई माह में 191 रैक अधिक लोडिंग की गई है।

इन बिजली घरों पर पहुंचाया कोयला-

रेलवे ने कटनी-बीना, बीना-कोटा और कटनी-सिंगरौली रेल रूट पर सबसे ज्यादा मालगाडियों को चलाया गया। इन मालगाडियों की मदद से मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के औद्योगिक और रहवासी क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति के लिए बिजली घरों तक कोयला पहुंचाया।

इनमें कोल साइडिंग्स जेपीवीएन निवास रोड (कटनी-सिंगरौली), एनटीपीसी गाडरवारा (इटारसी-जबलपुर), पीएसएसएस बीड़ (इटारसी-खण्डवा), जेबीटीएस सेमरखेड़ी (बीना-कोटा), केपीआरजे झालावाड़ सिटी (रामगंजमंडी-झालावाड़ सिटी), एपीएलएस सालपुरा (कोटा-रुठियाई), पीसीएमसी मोतीपुरा चैकी (कोटा-रुठियाई) एवं जीटीपीएस कोटा गुरला (कोटा-मथुरा) थे।

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