जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। गर्मी के सीजन में वैसे तो शहर के अधिकतर वार्ड जलसंकट से जूझ रहे हैं। लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल वार्ड के अंर्तगत आने वाले मेडीकल कालेज रोड स्थित क्रेशर बस्ती, कबीर मठ में जलसंकट इस कदर गहराया है कि नागरिक पानी के लिए त्राहिमान कर रहे हैं। क्षेत्र में पिछले करीब तीन माह से जलसंकट के हालात बने हुए हैं। बस्ती में करीब डेढ़ हजार अाबादी निवास करती है। लेकिन नगर निगम द्वारा महज दो बोरवेल के जरिए पेयजल की आपूर्ति कराई जा रही है। उसमें भी पानी देने का कोई समय निर्धारित नहीं है। स्थानीय नागरिकाें की माने तो बोरवेल से पानी कभी रात को 12 बजे तो कभी तड़के 4 बजे दिया जाता है। पहाड़ी क्षेत्र होने से ऊपर की बस्ती में पानी पहुंच ही नहीं पाता है। दो जून के पानी के लिए लोग काम-धंधा छोड़ कर पानी की जद्दोजहद में जुटे रहते रहे।

तीन बस्तियों की दो हजार आबादी दो बाेरवेल के भरोसे-

स्थानीय नागरिक देवेंद्र विश्वकर्मा, अमर चौधरी ने बताया कि बाजमामठ के समीप शास्त्री नगर, क्रेशर बस्ती और कबीर मठ की तीन बस्तियां बसी है। जिसकी आबादी तकरीबन दो हजार से ज्यादा है। लेकिन पेयजल आपूर्ति के नाम पर सिर्फ दो बोरवेल ही है। जिसके जरिए पीने का पानी दिया जाता है। निचली बस्तियों में तो पानी पहुंच जाता है लेकिन ऊपर की बस्तियों में प्रेशर कम होने से पानी नहीं पहुंच पाता। गर्मी के इस सीजन में लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।

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प्रेशर बढ़ाने, आपरेटर बदलने की मांग-

क्षेत्रीय नागरिकों ने बताया कि बोरवेल चालू और बंद करने वाले आपरेटर काफी बुर्जुग है। इसलिए पेयजल आपूर्ति का कोई समय निर्धारित नहीं है। कभी शाम तो कभी रात तो कभी तड़के ही आपूर्ति शुरू कर दी जाती है। नागरिकों ने पंप आपरेटर बदलने के साथ ही बोरवेल से पानी का प्रेशर बढ़ाने की मांग की है। ताकि ऊपर की बस्तियाें तक पानी पहुंच सके।

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न नगर निगम ध्यान दे रहा नेता

क्षेत्रीय नागरिकों में नगर निगम के खिलाफ नाराजगी है वहीं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ गुस्सा भी है। उनका कहना है कि चुनाव के समय तो जनप्रतिनिधि वोट लेने आते हैं लेकिन आज तक जलसंकट की समस्या दूर करने के प्रयास नहीं किए गए। यहां पानी की टंकी की दरकार है लेकिन नगर निगम ध्यान दे रहा न जनप्रतिनिधि।

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इस संंबंध में अभी तक नागरिकों ने शिकायत नहीं की है। मामला संज्ञान में आ गया है, जलापूर्ति व्यवस्था ठीक करने के प्रयास किए जाएंगे। -कमलेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री जल

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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