पीयूष बाजपेयी, जबलपुर। परिसीमन के बाद आपका वार्ड यदि दूसरे वार्ड में शामिल हुआ है, तो आपके नाम से बने तमाम प्रमाण पत्र के पते में बदलाव करना पड़ सकता है। क्योंकि पहले बने प्रमाण पत्रों में दर्ज पता वार्ड बदलते ही बदल जाएगा। इससे बड़ी समस्या का सामना उन ग्रामीणों को करना होगा जो गांव के वार्ड से शहरी वार्ड में शामिल कर लिए गए।

ऐसे ग्रामीणों को उन योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा जो अभी तक ग्रामीण विकास विभाग से लेते आए हैं। हालांकि पुराने पते को अमान्य या खारिज करने से जुड़े नियम नहीं बने हैं। बावजूद इसके बहुत से सरकारी या गैर सरकारी काम कराते समय आपको पते का वेरिफिकेशन देने कुछ जरूरी दस्तावेज या प्रमाण पत्र तो बनवाने ही होंगे। जिसके चलते शासन की जेब भरेगी और जनता की हल्की होगी।

वार्ड बदल जाने से आधार कार्ड, पेन कार्ड, राशन कार्ड, मूल निवासी, आय प्रमाण पत्र और यहां तक की पासपोर्ट के पते को सुधारने में लोगों को फिर से नए प्रमाण पत्र और दस्तावेज तैयार कराने होंगे। यदि आपको बैंक से लोन लेना हो तो बैंक वाले पुराना पता मान्य नहीं करेंगे। आपको यदि शासन की किसी योजना का लाभ लेना होगा तो वर्तमान निवास से जुड़े मूल निवासी या दूसरे दस्तावेज दिखाने होंगे। ये काम प्रदेश की 14 नगर पालिका निगम और 100 नगर पालिकाओं सहित 263 नगर परिषदों के वार्ड परिसीमन के लाखों लोगों को करना पड़ सकता है।

ऐसे मिलेगा शासन को राजस्व

- आपके पहले बने मूल निवासी प्रमाण पत्र को दोबारा बनाना होगा। इसके लिए लोकसेवा केंद्र में आवेदन के लिए होने वाला खर्च मिलाकर लगभग 100 रुपए होगा।

- राशन कार्ड के लिए जिला खाद्य विभाग को आवेदन देना होगा। इस काम के लिए भी शपथ पत्र तैयार कराना होगा। जितने भी शपथ पत्र जमा होंगे उससे शासन को राजस्व मिलेगा।

- यदि आपका चयन सरकारी नौकरी के लिए हो गया तो ऐसे लोगों को अपने सभी प्रमाण पत्रों के साथ पता बदलने से जुड़ा शपथपत्र भी देना होगा। ये भी राजस्व बढ़ाने में मददगार होगा और लोगों की जेब हल्की होगी।

- लोकसेवा केंद्र से जारी होने वाले अधिकांश प्रमाण पत्र जैसे जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र में पता फिर से बदलने की कवायद करनी होगी। ऐसे प्रमाण पत्र की जरूरत सबसे ज्यादा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए ही की जाती है। लेकिन पता बदलने से पुराने प्रमाण पत्र के साथ नया वोटर कार्ड या मूल निवासी तो बनाना ही होगा।

- आधार कार्ड में मूल निवास जो पहले दर्शाया गया था वो अब नहीं रहेगा। आधार कार्ड में पता सुधारने की कवायद फिर करनी होगी। क्योंकि वर्तमान में बैंक खाता खोलने से लेकर विभिन्न योजनाओं में आधार कार्ड और उसमें दर्ज पते को ही माना जा रहा है।

वोटर कार्ड का खर्च कौन उठाएगा

जिले में 17 लाख से ज्यादा लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं। सबसे बड़ी पहचान के तौर पर वोटर कार्ड के पते को ही माना जाता है। लेकिन अब लोगों को ये चिंता सता रही है कि वोटर कार्ड निर्वाचन कार्यालय बनाकर देगा या फिर नया कार्ड बनाने के लिए शुल्क चुकाना होगा।

मुझे बैंक में लोन का आवेदन देना है। लेकिन अब ये समझ नहीं आ रहा कि मेरा वार्ड बदलने पर पता भी बदलेगा और बैंक वाले पता बदलने से जुड़े दस्तावेज की डिमाण्ड करेंगे।

-ऋषि सेन, निवासी शंकर घी भण्डार

ऐसे गांव जो शहर में शामिल किए जा रहे हैं, उनकी ग्रामीण जनता को बहुत सी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो जाएगा। ऐसी कई समस्याएं हैं, जो सीधे तौर पर जनता को प्रभावित करेंगी।

-दिलीप राय, नगर पंचायत भेड़ाघाट अध्यक्ष