जबलपुर(नईदुनिया रिपोर्टर)। कोरोना ने हर किसी की हालात बेहाल कर दिया है। किसाान परेशान है, व्यापारी परेशान, लोग इस बात से परेशान है कि वे घर में कैद होकर रह गए है। जो लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में है, वे बेहतर इलाज, अस्पताल और डॉक्टर न मिलने से परेशान है। इन सभी की समस्याओं और हालातों को देखते हुए शहर के वरिष्ठ साहित्यकार और कवि अपनी भावनाओं को रचनाओं के माध्यम से व्यक्त कर रहे हैं। होली के दौरान से ही लाकडाउन जैसी स्थितियां बन गई थीं, जिससे कि कवियों और व्यंग्यकारों को अपने कार्यक्रमों को निरस्त करना पड़ा। इससे इनके काम पर खास असर पड़ा, लेकिन इन दिनों लाकडाउन के कारण भी ये घर पर हैं और हालातों से संबंधित अपनी रचनाओं को इंटरनेट मीडिया पर साझा अपना काम पूरा कर रहे हैं। ये लोगों को जागरुक भी कर रहे है कि लोग कोरोना में घर पर रहे स्वस्थ्य रहे। जिंदगी से बढ़कर कोई काम नहीं होता।

कोरोना पर लिखा गीत: राष्ट्रीय कवि राज सागरी ने कोरोना पर गीत लिखा है, वो असर अब कहां दुआओं में , घुल रहा है अब हवाओं में। इसे शहर के मनोज चौरसिया ने गाया है। यह गाना इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसे सभी काफी पसंद कर रहे हैं। वरिष्ठ कवि राज सागरी ने बताया कि खाली समय है, तो इस तरह के काम करके खुद के साथ ही लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं।

लगातार जारी है रचनाएं लिखने का काम: वरिष्ठ कवि सुरेश विचित्र ने बताया कि लाकडाउन के दौरान अपने अन्य कामों को करने के साथ ही रचनाएं और व्यंग्य का काम लगातार जारी है। इन दिनों किसानों की हालात खराब है। इस पर भी रचनाएं लिख रहे हैं। इसके साथ ही कोरोना के दौरान बने हालातों को लेकर लगातार कुछ न कुछ लिख रहे हैं। हाल ही में कोरोना पर लिखा है कुछ है तो कुछ नहीं है, मरीज है तो अस्पताल नहीं है, अस्पताल है तो बेड नहीं है। इसे इंटरनेट मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है।

Posted By: Sunil Dahiya

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