जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर मेडिकल कालेज के समीप पिसनहारी की मढिया के सामने स्थित दुकानों को खाली कराने पर रोक लगा दी। साथ ही याचिकाकर्ताओं को नगर निगम में अपील करने स्वतंत्र कर दिया। नगर निगम, जबलपुर को दुकानदारों की अपील का 45 दिन के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।इस बीच याचिकाकताओं के खिलाफ किसी तरह की कठोर कार्रवाई को प्रतिबंधित करते हुए याचिका का पटाक्षेप कर दिया गया। न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी राजेश जैन, कोमल चंद्र जैन, मोहनलाल अग्रवाल, पवन कुमार जैन, मुरलीलाल बर्मन व राकेश कुमार गुप्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज चतुर्वेदी व विजय राघव सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि नगर निगम, जबलपुर के बाजार अधीक्षक ने याचिकाकर्ताओं को पिसनहारी की मढिया के सामने की दुकानें 24 घंटे के भीतर खाली करने का नोटिस थमाया था। ऐसा न किए जाने पर बलपूर्वक कब्जा किए जाने की चेतावनी दी गई थी। इसी के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

मां-बेटी का दोष सिद्ध न पाकर किया बरी :

प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी रश्मि तिवारी की अदालत ने दोष सिद्ध न पाते हुए अधारताल निवासी मां-बेटी को एक आपराधिक मामले में दोषमुक्त कर दिया। आरोपित एकता व कृतिका की ओर से अधिवक्ता ओमशंकर विनय पांडे ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अधारताल पुलिस ने बिना किसी ठोस आधार के महज संदेश को कारण मानते हुए अपराध पंजीबद्ध कर लिया था। यहां तक कि पुलिस ने अनुसंधान की मूलभूत प्रक्रिया तक ठीक से पूरी नहीं की। इस वजह से निर्दोष होते हुए भी मां-बेटी को परेशान होना पड़ा। समाज में उनकी छवि को धक्का लगा।अभियोजन आरोप सिद्ध करने में नाकाम रहा है। अदालत ने सभी तर्क पर मामले पर गौर करने के बाद दोष सिद्ध न पाते हुए बरी कर दिया।

Posted By: Jitendra Richhariya

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