जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर के सबसे पुराने और उम्रदराज शास्त्री ब्रिज को अब नए दौर के हिसाब से बनाने की जरूरत है। यह ब्रिज बढ़ते यातायात के दवाब को झेल नहीं पा रहा है। यहां पर नया फ्लाईओवर की जरूरत महसूस की जा रही है, लेकिन शासन से मंजूरी नहीं मिलने से फ्लाईओवर निर्माण का काम अटका हुआ है। वर्ष-2019 से बने प्रस्ताव को अब तक शासन से मंजूरी नहीं मिल पा रही है। अभी फ्लाईओवर को बजट में शामिल कर लिया गया है। अब विभाग से प्रशासकीय मंजूरी मिलने का इंतजार है। यह फ्लाईओवर बनने के बाद शहर में यातायात का दवाब कम होगा।

150 करोड़ निर्माण लागत

लोक निर्माण सेतु ने शास्त्री ब्रिज पर फ्लाईओवर बनाने का 150 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया है। लोक निर्माण विभाग के नक्शे में फ्लाईओवर की लंबाई 1840 मीटर रखी गई है। इसकी चौड़ाई 16 मीटर होगी। 38 मीटर रेलवे क्षेत्र से गुजरेगा। पुराने बसस्टैंड के आगे पेट्रोल पंप से फ्लाईओवर प्रारंभ होगा, जो मेडिकल रोड की तरफ निकलेगा। मौजूदा ब्रिज के ऊपर पिलर बनाकर यह फ्लाईओवर का निर्माण होगा। बस स्टैंड से महानद्दा मेडिकल की ओर जाने वाले वाहन सीधे फ्लाईओवर के जरिए बाहर निकल जाएंगे। जिन वाहनों को होमसाइंस रोड,ग्वारीघाट या गोरखपुर की तरफ जाना होगा वो शास्त्री ब्रिज से होकर निकलेंगे। मौजूदा ब्रिज को भी लोक निर्माण विभाग द्वारा जीर्णोद्धार किया जाएगा। विभाग ने पुणे के इंजीनियरों से डिजाइन तैयार कराई है।

ज्ञात हो कि वर्ष-2019 में शास्त्री ब्रिज में फ्लाईओवर निर्माण को लेकर प्रस्ताव बना था। उसके बाद विभागीय मंजूरी का इंतजार किया गया। बाद में नए सिरे से दोबारा प्रस्ताव विभाग की तरफ से भेजा गया। फिलहाल विभाग ने शास्त्री ब्रिज फ्लाईओवर को बजट में शामिल कर लिया है। सिर्फ शासन से प्रशासकीय मंजूरी मिलने का इंतजार है।

57 साल पुराना इतिहास

शास्त्री ब्रिज का निर्माण 1962 में शुरू हुआ। 1964 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने इसका लोकार्पण किया था। इतने वक्त में ब्रिज की स्थिति जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह से ब्रिज का कंक्रीट उखड़ने लगा है। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक ब्रिज की उम्र 50 साल होती है।

इनका कहना है

शास्त्री ब्रिज पर फ्लाईओवर निर्माण के लिए प्रस्ताव नए सिरे से बनाकर भेजा जा चुका है। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से फ्लाईओवर की निर्माण लागत आएगी। बजट में इसे शामिल किया गया है, सिर्फ प्रशासकीय मंजूरी का इंतजार है।

नरेंद्र शर्मा, ईई लोक निर्माण विभाग सेतु

Posted By: Jitendra Richhariya

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