जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शासन की ओर से आम आदमी का भटकाव कम करने के उद्देश्य से लोक सेवा केंद्रों की स्थापना की गई थी, लेकिन लगता है कि ठेकेदाराें के भरोसे इस व्यवस्था को छोड़ प्रशासन बेफिक्र हो चुका है। आम आदमी यहां आकर लूट रहा है और ठेकेदार मलाई मारने में लगे हैं।

जिले में एक अनुमान के मुताबिक रोजाना करीब एक हजार आवेदन विभिन्न लोकसेवा केंद्रों से जमा होते हैं। प्रत्येक आवेदन के साथ तीस से पचास रुपये लोकसेवा केंद्र अपनी सेवा-शुल्क की एवज में वसूलता है। एक पेज के आवेदन पत्र का मूल्य पांच रुपये है। जबकि इसी फार्म की फोटोकापी एक रुपये में हो सकती है। फार्म की कोई रसीद तो दी नहीं जाती और न ही फार्म पर किसी प्रकार का शुल्क लिखा होता है। इसलिए कई बार आवेदकों से दस-दस रुपये तक लोकसेवा केेंद्र के कर्मचारी ऐंठ लेते हैं।

यहीं से शुरू हो जाती है दलाली

लोकसेवा केंद्र में फार्म भरने के साथ ही दलालों का काम शुरू हो जाता है। काम करवाने से लेकर जल्दी और जल्दी से जल्दी काम कराने का अलग-अलग सेवा-शुल्क फिक्स है। दलाल पैसे लेकर लोकसेवा केंद्र से आवेदन को आगे बढ़वाते हैं और फिर संबंधित दफ्तर जाकर बाबू और आपरेटरों के माध्यम से काम करवा लेते हैं। इस प्रक्रिया में उगाही में सभी साझीदार होते हैंं।

बीपीएल में सबसे बड़ा गोलमाल

गरीबी रेखा के कार्डों का बनना अमूमन बंद जैसा है। लेकिन आम आदमी का झुकाव गरीबी रेखा के कार्ड के प्रति बहुत ज्यादा है। एक फार्म निरस्त होने के बाद आवेदक मृग-मारीचिका के शिकार की तरह बार-बार कोशिश करते हैं, हर बार मुफ्त में पैसा फूंकते हैं, लेकिन उनके कार्ड नहीं बनते। बीपीएल कार्ड अपवाद स्वरूप किसी बड़े अधिकारी की अनुशंसा पर ही बन पाते हैं, जहां तक आम आदमी की पहुंच ही नहीं होती। बताया जाता है कि कुल आवेदनों मेंं से 60 फीसदी तक तो निरस्त हो जाते हैं। शेष में से कुछ में आपत्ति या कमी बताकर उनपर रोक लगा दी जाती है, जबकि कुुछ का सौदा पटने या वरिष्ठ अधिकारियों के दखल की वजह से काम हो जाता है।

दलालों की भरमार

जिले के सभी लोकसेवा केेंद्र में दलालों की भरमार है। कोई भी काम बिना दलाल के संपर्क में नहीं हो पाता। दलाल किसी भी काम का कितना पैसा वसूलेगा ये मोल-भाव के बाद तय होता है। -लोकेद्र सिंह, आमजन

अगर आवेदक ने दलालों के माध्यम से सेवा शुल्क नहीं चुकाई तो उसका काम नहीं हो सकता। अगर किसी का काम होगा भी तो हफ्तों बाद, वह भी दफ्तर के अनेक चक्कर काटने के उपरांत।-कल्पना सिंह, आमजन

अनेक काम ऐसे है जो सीधे संपर्क करने पर एक दिन में हो सकते हैं लेकिन लोकसेवा केंद्र से वही काम काम तीन से पांच दिन में होता है। कई मामलों में यह सेवा समय बर्बाद कराने वाली है।- देवेंद्र श्रीवास्तव, आमजन

प्रत्येक सेवा का तय शुल्क है, वहीं दिया जाना है। आवेदक, फार्म जमा करने के बाद तय समय सीमा तक इंतजार करे। इसके बाद अगर काम नहीं होता तो मेरे पास आए। किसी दलाल के चक्कर में पड़ने की जरूरत नहीं है। -डा. इलैयाराजा टी, कलेक्टर

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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