जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि।

रेल कर्मचारियों को उचित इलाज देना रेलवे की जिम्मेदारी है, लेकिन वह इस जिम्मेदारी से पीछे हट रहा है। रेलवे लगातार रेल कर्मचारियों के विरोध में तुगलकी फरमान निकाल रहा है, जिससे बीमार कर्मचारियों की परेशानी बढ़ने लगी है। पश्चिम मध्य रेलवे मजदूर संघ के महामंत्री अशोक शर्मा ने बताया कि रेलवे बोर्ड द्वारा 23 नवंबर को एक तुगलकी फरमान निकाला था, जिसमें कहा गया था कि रेल कर्मचारियों को निजी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा पर रोक लगा दी। इसके तहत रेलवे अस्पताल से केवल सरकारी अस्पताल या आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत आने वाले अस्पताल में ही रेल कर्मचारी और उनके स्वजन रेफर किए जाएंगे।

मजदूर संघ ने किया था विरोध:

इस प्रावधान के तहत यह भी कहा गया कि यदि इन अस्पतालों में इलाज की सुविधा नहीं होने की दशा में ही अति आवश्यक गंभीर स्थिति में कर्मचारी को निजी अस्पताल में रेफर किया जाएगा। मजदूर संघ ने इसका विरोध किया और चेतावनी दी कि रेलवे बोर्ड यदि इस तुगलकी फरमान को वापस नहीं लेती है तो इसका देशव्यापी विरोध किया जाएगा।

रेलवे बोर्ड को लिखा था पत्र:

संघ के प्रवक्ता सतीश कुमार ने बताया कि एनएफआइआर के महामंत्री डॉ.एम राघवैया और एनएफआइआर के कार्यकारी अध्यक्ष एवं संघ अध्यक्ष डॉ.आरपी भटनागर ने इस तुगलकी फरमान का विरोध किया। इतना ही नहीं विरोध के बाद रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद यादव को पत्र लिखकर रोष प्रकट किया और इस फरमान को वापस लेने कहा गया, जिसके परिणाम स्वरूप रेलवे बोर्ड ने अपने इस आदेश को वापस ले लिया है। अब पहले की तरह की रेल कर्मचारी और उनके स्‍वजनों को निजी अस्पताल में बेहतर इलाज मिलेगा।

Posted By: Brajesh Shukla

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