Railway Fake Job News:अतुल शुक्ला, जबलपुर। मध्य प्रदेश की जबलपुर आरपीएफ ने बिहार के गया जिले के वजीरगंज से रविवार को एक ऐसे गिरोह को पकड़ा, जो फर्जी विज्ञापन वायरल कर जेब भरते थे। सोशल मीडिया के जरिए गिरोह के सदस्य रेलवे में फर्जी भर्ती के विज्ञापन इंटरनेट पर जारी कर डालर में कमाई करते थे। इतना ही नहीं, गिरोह ने पैसे लेने के लिए एसबीआइ में एक अंतरराष्ट्रीय खाता भी खुलवाकर रखा था। बेरोजगार युवकों से बड़ी राशि उगाहने वाले दो शातिर कुंदन प्रसाद और सोनू प्रसाद फिलहाल गया की जेल की हवा खा रहे हैं। आरपीएफ का दावा है कि भारतीय रेलवे में यह पहला ऐसा मामला है, जब फर्जी भर्तियों की जानकारी देकर शातिर गिरोह ने पैसे कमाए। उनका खाता सीज कर दिया गया है, जिसकी जांच वजीरगंज थाना पुलिस कर रही है।

ऐसे होती थी इनकी कमाई

जबलपुर आरपीएफ को एक ऐसे विज्ञापन के बारे में पता चला जो लोगों के मोबाइल पर तेजी से वायरल हो रहा था। यह संदेश रेलवे में आरपीएफ की भर्ती को लेकर था। इसमें दिए गए लिंक में रेलवे में आने वाली आरपीएफ की भर्ती से जुड़ी जानकारी के साथ, परीक्षा, पाठ्यक्रम और एडमिट कार्ड का विवरण अपलोड किया गया था। लिंक क्लिक करते ही युवक वाट्सएप और टेलीग्राम पर बनाए गए ग्रुप की जानकारी से जुड़ते थे। इस ग्रुप में किसी एक लिंक को ओपन करते ही मोबाइल स्क्रीन पर गवर्नमेंट जाब सेंटर नामक ग्रुप आ जाता था। व्यूअर जितनी देर इस साइट पर रुकता था, उन्हें उतनी कमाई होती थी और कमाई का पैसा एसबीआइ के खाते में आ जाता था। जांच में पता चला कि इस फर्जी विज्ञापन को देखने वालों की संख्या लाखों में थी।

ग्रुप के एडमिन ही आरोपित

आरपीएफ में 19800 पदों का फर्जी विज्ञापन वायरल करने वाले आरोपित कुंदन प्रसाद और सोनू प्रसाद को गया के वजीरगंज के ग्राम तिलोरा से पकड़ा गया है। इन तक पहुंचने में आरपीएफ को लगभग चार दिन का वक्त लगा। आरपीएफ इनके फर्जी विज्ञापन के जरिए ही इन तक पहुंची। एएसआइ दीपेश मिश्रा और आरक्षक अभिषेक कुशवाहा, दोनों आरोपित के फर्जी विज्ञापन में दिए गए लिंक के जरिए वाट्सएप ग्रुप से जुड़े। आरोपित ही एडमिन निकले। इन्होंने अपना नंबर यहां सही दर्ज किया था। नंबर की लोकेशन गया के ग्राम तिलोरा में मिली और वे वहां से पकड़ में आ गए।

Posted By: Prashant Pandey

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