जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म से लेकर ट्रेन तक में यात्रियों को परोसा जाने वाला खाना कितना गुणवत्ता से भरा है। इसकी जांच के लिए कितने अधिकारी नियुक्त है और यहां तक की जांच के लिए कितने सैंपल लिए गए। इसकी जानकारी जबलपुर रेल मंडल ने देने से मना कर दिया है।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच ने रेलवे से आरटीआइ के तहत यात्रियों को दिए जा रहे खाने से जुड़ी जानकारी मांग गई, जिसे देने से जबलपुर रेल मंडल ने मना कर दिया है। प्रबंधन से नियमों को हवाला देकर उन सभी सवालों का जवाब नहीं दिया है, जो खाने की गुणवत्ता को लेकर अक्सर रेलवे पर उठते हैं।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच के डा.पीजी नाजपांडे ने बताया कि पिछले छह माह में स्टेशनों पर बिक रहे खाद्य पदार्थो के कितने सैंपल लिए गए, कितनों की जांच की और कितनों में मिलावट मिली। इसके साथ ही यह भी पूछा गया कि इसके बाद रेलवे ने कितनों पर कार्रवाई करते हुए लाइसेंस रद किए और उन पर मामला दर्ज कराया। इस सवालों का जवाब देने से रेलवे मंडल प्रबंधन ने मना कर दिया है। उन्होंने बताया कि रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ी जानकारी देने पर चुप्पी साध ली है। इससे यह साफ होता है कि रेलवे यात्रियों को दिए जा रहे खाने की गुणवत्ता को सुधारने को लेकर कितना जागरूक है। उन्होंने मंडल के अधिकारियों पर सांठगांठ करने का आरोप भी लगाया।

कार्रवाई में सिर्फ खानापूर्ति

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच ने बताया कि पिछले माह स्टेशनों पर खराब खाद्य पदार्थो की बिक्री धड़डे से की जा रही है। सैकड़ों खाने की शिकायत करने के बाद भी एक पर भी गंभीर कार्रवाई नहीं की गई। दोषियों को मामूली अर्थदंड लगाकर उन्हें छोड़ दिया गया। जबकि आज पूरे मंडल में 300 से ज्यादा अवैध वेंडर खाना बेंच रहे हैं। यहां तक की पश्चिम मध्य रेलवे जोन और मंडल में 100 से ज्यादा प्रमुख स्टेशन हैं, जिसमें एक खाद्य अधिकारी नियुक्त किए गया है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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