जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा कुलपति प्रो.कपिल देव मिश्र की अध्यक्षता में आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर एक दिवसीय आनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। जहां मुख्य वक्ता प्रशांत पोल रहे। संयोजक व विभागाध्यक्ष प्रो. अलका नायक की विशेष उपस्थिति में परिचर्चा हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र ने कहा कि वर्तमान में परिचर्चा का विषय अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है। जिसका उद्देश्य सभी तक शिक्षा की पहुंच, समानता, गुणवत्ता युक्त शिक्षा और उत्तरदायित्व जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देना है। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति का उद्देश्य कौशल विकास को भी बढ़ावा देना है। युवाओं को अपनी संस्कृति व नैतिक मूल्यों से जोड़े रखना है।

प्रमुख वक्ता राष्ट्रीय चिंतक व विचारक प्रशांत पोल ने परिचर्चा के विषय के अनेक पहलुओं पर बड़े ही रोचक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्राचीन शिक्षा व्यवस्था को किस तरह ध्वस्त किया गया और उसकी जगह अंंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा दिया गया। युवाओं को संस्कारित करने के लिए आवश्यक है कि प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का उपयोग किया जाए। गुरुकुल में रहकर किस तरह विद्यार्थी अपने गुरुओं का आदर करना सीखते थे। संस्कारित बनते थे। आज की पीढ़ी को संस्कारवान बनाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम संयोजक प्रो. अलका नायक द्वारा कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में बताया। डा. परिधि वर्मा ने सभी अतिथियों का परिचय दिया। डा. अनुपमा ब्योहार ने प्र्रतिवेदन प्रस्तुत किया। संचालन डा. अमृषा देशमुख व आभार प्रदर्शन डा.रानी वैद्य ने किया।

इस अवसर पर विभाग के अतिथि विद्वान डा. निधि दरबारी, डा. दीप्ति जैन, डा. कपिला शर्मा, डा. डिंपल वर्मा, डा. मोहसिन खान व अन्य सदस्यों का सहयोग रहा।

Posted By: Ravindra Suhane

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