Jabalpur News : जबलपुर (नई दुनिया प्रतिनिधि) । जबलपुर के नर्मदा तटों में गंदे नाले-नाली मिलने की सालों पुरानी समस्या निर्मूल करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिया गया है। निर्धारित नर्मदा शुद्धिकरण अभियान अंतर्गत 16 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रविधान करते हुए निविदा जारी कर दी गई है। लिहाजा, उम्मीद है कि शीघ्र ही नर्मदा में मिलने वाले नाले-नालियों के मुहानों पर उच्च गुणवत्ता के जल शुद्धिकरण संयंत्र लगा दिए जाएंगे। जिनके हरकत में आते ही नर्मदा में एक बूंद भी गंदा नहीं मिलेगा। दरअसल, जबलपुर के प्रथम नागरिक जगत बहादुर सिंह अन्नाू की संकल्प शक्ति से यह स्वप्न साकार होने जा रहा है। उन्होंने पदभार ग्रहण करने के साथ ही इस सिलसिले में दिशा-निर्देश जारी कर दिए थे। साथ ही संकल्प लिया था कि सतत निगरानी पूर्वक इस कार्य को अमली जामा पहना कर आगामी दीपावली में सवा लाख दीपों के श्रृंगार से नर्मदा तट को जगमगा देंगे।

पॉपकॉर्न, अगरबत्ती और अब भूमि

संस्कारधानी के समागम रंगमंडल ने पॉपकॉर्न और अगरबत्ती के बाद भूमि के मंचन के जरिए संजीदा रंग रसिकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। जयपुर में प्रथम मंचन के साथ प्रशंसित हो चुके संस्कृतनिष्ठ हिंदी संवादों वाले नाटक भूमि का जबलपुर में द्वितीय मंचन शानदार रहा। प्रतिभाशाली नाटककार आशीष पाठक मोना, निर्देशक स्वाति दुबे और समागम रंगमंडल की क्रिएटिव टीम रचनात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत है। जिसकी बदौलत बुंदेली संवादों वाला नाटक अगरबत्ती विगत छह वर्ष में देश के 25 शहरों में 40 बार मंचित होने के साथ थियेटर के सबसे बड़े मेटा अवार्ड से अलंकृत हो चुका है। दरअसल, पुष्प की सुगंध हवा के विपरीत नहीं फैलती किंतु सृजनात्मकता की कीर्ति चातुर्दिक फैलती है, इसी तर्ज पर समागम रंगमंडल के बेहतरीन रंगकर्म का राष्ट्रीय फलक पर यशोवर्धन हुआ है। जबलपुर के शहीद स्मारक प्रेक्षागृह से लेकर दिल्ली के श्रीराम सेंटर तक समागम रंगमंडल की खूब सराहना हुई है।

परम की मची धूम

यह परम का शहर है। प से परसाई, र से रजनीश और म से महर्षि। पिछले दिनों परसाई जन्मशती के आयोजनों की शुरुआत से फिजां में रंग परसाई छाने लगा। वहीं ओशो निर्वाण दिवस पर जबलपुर की लघुकाशी देवताल से सम्बोधि स्थली भंवरताल गार्डन के मौलश्री वृक्ष तक ध्यान और प्रेम पूर्वक उत्सव की आनन्दमय बयार चली। इससे पूर्व शहर के हृदय स्थल गोलबाजार से घमापुर की हनुमानटोरिया तक महर्षि को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। दरअसल, हिंदी साहित्य के व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई, आध्यात्मिक वक्तृत्व कला के सक्रिय शिरोमणि आचार्य रजनीश यानि ओशो और वेद विज्ञान के भावातीत प्रणेता महर्षि महेश योगी ने संस्कारधानी को वैश्विक ख्याति दिलाने की दिशा में अभूतपूर्व महनीय अवदान दिया है। ये तीनों ही महान विभूतियां सत्य प्रकाशक, भ्रांति विनाशक और सच्चिदानंद स्वरूप में कालजयी हैं। इनका अनुपम व्यक्तित्व-कृतित्व देश-दुनिया से कहीं अधिक जबलपुर के लिए गौरववर्धक, अविस्मरणीय और प्रेरणास्पद है।

जबलपुर की जनवरी बल्ले बल्ले

जबलपुर को जनवरी माह में राज्य सरकार की ओर से विशेष महत्व दिया जा रहा है। चूंकि संस्कारधानी जबलपुर महाकोशल प्रांत का नेतृत्व करने वाली सर्व प्रमुख नगरी है, अत: जाहिरतौर पर इसे राजकीय तबज्जो मिलने से समग्र महाकोशल का मानवर्धन हो रहा है। दरअसल, इस बार जबलपुर में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्रात्मक गणराज्य भारत का गणतंत्र दिवस मुख्य समारोह अन्य वर्षो की अपेक्षा कहीं अधिक भव्य स्वरूप में आयोजित होगा। इसके लिए गैरीसन ग्राउंड, सदर और आयुर्वेदिक महाविद्यालय प्रांगण, ग्वारीघाट में पूर्व तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराएंगे। जिसके बाद राष्ट्रीय महापर्व अंतर्गत निर्धारित कार्यक्रमों की श्रृंखला में सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक सोनू निगम और शान की सुमधुर आवाज गूंजेगी। जबलपुर की जनवरी बल्ले बल्ले होगी। साथ ही राज्य सरकार को महाकोशल की उपेक्षा के लांछन से भी किंचित निजात मिलेगी।

Posted By: Jitendra Richhariya

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