जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। संगीत संकल्प द्वारा बेनी कुंवर स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। रानी दुर्गावती संग्रहालय स्थित कलावीथिका में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि शिक्षाविद, संगीतकार अनिल खानवलकर ने स्व. बेनी कुंवर के संगीत के प्रति समर्पण की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत से बांधे रखने के लिए आवश्यक है। बेनी कुंवर की स्मृति में यह आयोजन हर साल होता है। जो अन्य लोगों को प्रेरणा देता है कि वे भी शास्त्रीय संगीत से संबंधित कलाकारों को इसी तरह याद करें और आने वाली पीढ़ी तक इनके बारे में जानकारी पहुंचाने का प्रयास करें।

इस अवसर पर जबलपुर के गायक कुलजीत सिंह सेंगर ने राग भीमपलासी में मध्य लय बंदिश-बेगुन काहे करत हो गुमान से स्वरांजलि की शुरुआत की। इसके बाद अप्रचलित राग अमर प्रिया में छोटा ख्याल पार करो तुम मोरी नैया का गायन किया। उप शास्त्रीय के अंतर्गत राग पहाड़ी में ठुमरी प्रस्तुत की। ठुमरी सैंया बिना घर सूना... में अनेक लोकगीतों की झलक थी और गीत सात सुरों का बहता दरिया भी था। अंत में वर्तमान देश काल पर केंद्रित गजल—रिश्ता एक दीवार ओर दर... तेरा भी है मेरा भी है.. से समापन किया। इस प्रस्तुति में रीपद कायंदे ने हारमोनियम पर और विभाष बेन ने तबला पर संगत दी। अतिथियों का स्वागत संजय वर्मा ने व संचालन प्रद्युम्न कायंदे ने किया। सांयोजन में वैशाली चांदोरकर, संध्या पाठ, डा. सुप्रिया बोस,शरद नामदेव, शंकर बोस का सहयोग रहा। संस्था की अध्यक्ष ने आभार व्यक्त करते हुए संगीत के प्रति संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। साथ ही बताया कि कोरोना के कारण आयोजन में कुछ विराम लगा है लेकिन संगीत से संबंधित आयोजनो का सिलसिला निरंतर जारी है। संगीत संकल्प द्वारा युवाओं के लिए भी आयोजन किए जाते हैं।

Posted By: Brajesh Shukla

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