जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। अब उम्मीद जाग गई है कि वर्षों से जारी इंतज़ार पूरा होगा। लंबित मांग पूरी होगी। अधिकार मिलेगा। न्याय के मंदिर में सेवा देने वालों को न्याय मिलेगा। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के उच्च वेतनमान से जुड़े मामले के लिए बनी विशेष कमेटी की रिपोर्ट सरकार ने सीलबंद लिफाफे में पेश की। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व जस्टिस अंजुली पालो की युगलपीठ ने रिपोर्ट की एक कॉपी याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को देने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 13 जून को निर्धारित की गई है।

इस मामले की विगत सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले में पूर्व में दिए आदेशों के परिपालन का रास्ता निकालने एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी में हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, विधि एवं विधायी कार्यविभाग के प्रमुख सचिव, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव और एडीशनल चीफ सेक्रेटरी शामिल थे।

पूर्व में मुख्य न्यायाधीश ने हाई कोर्ट कर्मचारियों के लिए उच्च वेतनमान की सिफारिश की थी। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कंपलायंस रिपोर्ट पेश कर बताया कि यदि उक्त अनुशंसा को मान लिया जाएगा तो सचिवालय एवं अन्य विभागों में कार्यरत कर्मियों से भेदभाव होगा और वे भी उच्च वेतनमान की मांग करेंगे, इसलिए केबिनेट ने अनुशंसा को अस्वीकर कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने कोर्ट काे बताया कि व सरकार ने पहले भी यही ग्राउंड लिया था, जिसे अस्वीकार किया जा चुका है। तत्कालीन जस्टिस जेके माहेश्वरी ने इसी मामले में 5 सितंबर 2019 को सरकार की इस दलील को नकारते हुए मुख्य न्यायाधीश की अनुशंसा पर विचार करने के आदेश दिए थे।

ये है मामला

हाई कोर्ट कर्मी किशन पिल्लई सहित 109 कर्मचारियों ने याचिका दायर कर उच्च वेतनमान और भत्ते देने के लिए 2016 में याचिका दायर की। इस मामले में हाई कोर्ट ने 2017 में राज्य सरकार को आदेश जारी किए थे। पालन नहीं होने पर 2018 में अवमानना याचिका प्रस्तुत की गई। हाईकोर्ट ने 10 मार्च 2021 को कहा कि 30 अप्रैल 2021 तक अमल नहीं हुआ तो विधि, सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव हाजिर होंगे। इस सिलसिले में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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