जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। छोटी लाइन से गोरखपुर बाजार, सदर, सिविल लाइन, सतपुला, रांझी मार्ग पर रात में जितने सड़क हादसे नहीं होते उससे ज्यादा खतरा बीमार होने का लगा रहता है। सदर पार करते ही मनमाने ढंग से बनाए गए ब्रेकर खतरा बनने लगते हैं। कई ब्रेकरों के निर्माण में ऊंचाई का ध्यान नहीं रखा गया है। इस मार्ग पर रात में रोशनी की भी कमी नजर आती है। जीसीएफ से सतपुला मार्ग पर चार बड़े ब्रेकर चालकों को वाहन से उछाल देते हैं। इन ब्रेकरों को सड़क पर ढलान के बाद बनाया गया है जिससे हादसों की आशंका भी बनी रहती है। जीसीएफ फैक्ट्री के मुख्य द्वार से सतपुला मार्ग पर अनगिनत गड्ढे हैं। ब्रेकर व गड्डों के कारण कई वाहन चालकों की रीढ़ की हड्डी में दर्द होने लगता है। कई वाहन चालकों को उपचार कराना पड़ रहा है। उक्त मार्ग पर कहीं भी गति की अधिकतम सीमा बताने वाले बोर्ड नहीं लगे हैं। सतपुला से रांझी मार्ग पर गोकलपुर से रांझी तक सड़क पर डिवाइडर बनाया गया है। जिसे जगह-जगह खोल दिया गया है। यू टर्न न लेकर डिवाइडर के बीच से वाहन पार करने की कोशिश में कई वाहन चालक इस मार्ग पर गंभीर दुर्घटना की चपेट में आ चुके हैं।, इस मार्ग पर कटंगा से सदर तक एक तरफ की सड़क जर्जर हालत में पहुंच गई है। समूचे मार्ग पर जगह-जगह आवारा कुत्ते वाहन चालकों को खदेड़ते नजर आए।

रात को सूनी सडक, सुबह वाहनों भरी

जबलपुर के सुहागी से महाराजपुर होते हुए पनागर तक जाने वाली मुख्य सडक पर रात के वक्त को वाहन चालक नहीं दिखते। इक्का-दुक्का बड़े वाहन, पूरी रफ्तार से सड़कों पर दौड़ते नजर आए। जबलपुर के अधारताल से महाराजपुर तक बन रही सीसी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। इस वजह से सड़क अधूरी, बिना प्रकाश व्यवस्था के नजर आती हैं। हालांकि महाराजपुर बायपास से पनागर तक बनी डमल सड़क पर सुबह के वक्त दूध वाहन और स्कूल की बसों की मौजूदगी दिखी। इस दौरान न तो सड़क किनारे किसी तरह का स्लोगन नजर आया और न ही डिवाइडर था। रात के वक्त जो सड़क चौड़ी नजर आ रही थी, वो सुबह लगभग पांच बजे दूध के वाहन और स्कूल बस से भरी थी। इस दौरान वाहन चालक को दाय-बाय चलने, ट्राफिक नियमों की जानकारी देने कोई भी साइन बोर्ड नजर नहीं आया। यहां पर सड़क के दोनों ओर गदंगी और बड़े वाहनों की पार्किंग ही दिखी।

सड़क से डेढ़ फीट ऊंचे उठे सीवर लाइन के चेम्बर हैं जानलेवा

शिवनगर कृषि उपज मंडी के बगल वाले मुख्य मार्ग में चलना जान जोखिम में डालने वाला है। खासतौर पर रात के वक्त तो यह मार्ग बेहद असुरक्षित बन जाता है। इस सड़क में गड्डे एक नहीं है सड़क की चौड़ाई भी अच्छी है। लेकिन सड़क के बीच सीवर लाइन के चेम्बर दुर्घटना की मुख्य वजह है। चेम्बर सड़क से डेढ़ फीट ऊंचे बने हुए है । जिस वजह से सपाट रोड़ पर रफ्तार से आने वाले वाहन इन सीवर लाइन के चेम्बर से कई बार टकरा कर दुर्घटना ग्रस्त हो चुके हैं। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार इसकी शिकायत स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। इधर नगर निगम भी इस सड़क निर्माण की खामियों को ठीक करने में कोई रूचि नहीं दिखा रही है। सड़क पर दो चेम्बर अधिक खतरनाक है।

महानद्दा से शाहीनाका तक सड़क पर अराजकता की भरमार

शहर के महानद्दा से लेकर उपनगरीय क्षेत्र गढ़ा अंतर्गत शाहीनाका चौराहे से तक सड़क पर अराजकता की भरमार देखने को मिली। आलम यह रहा कि जगह-जगह यातायात के नियमों की अनदेखी हो रही थी। जिस वाहन चालक की जैसी मर्जी हुई, वह वैसे ही अपने वाहन को राइट या रांग साइड से काटकर निकाल रहा था। इस वजह से दुर्घटनाओं का खतरा मात्र नहीं बना बल्कि दो-चार जगह वाहन आपस में टकराते हुए भी प्रत्यक्ष देखे गए। इस वजह से बहस भी हुई। महानद्दा से मदन महल की तरफ रुख करते ही मदन महल चौक पर उड्डयन सेतु के निर्माण की प्रक्रिाय जारी होने की वजह से वाहन चालक यहां-वहां जहां से भी मौका मिला वहां से दशमेश द्वार, मेडिकल रोड, मदन महल स्टेशन या फिर शुक्ला नगर की तरफ गति करता दिखा। सड़क पर गड्ढों की वजह से वाहनों का संतुलन जगह-जगह बिगड़ता दिखा। कई जगह कार वाले गलती करते दिखे तो कई जगह गलती सीधे तौर पर दोपहिया वाहन चालकों की थी। इस अराजकता को नियंत्रित करने ट्रेफिक पुलिस के हवलदार दूर-दूर तक नदारद थे। बहरहाल, शुक्ला नगर की ओर वाले मार्ग में गंगासागर से लेकर गुलौआ चौक तक सड़क पर यातायात के संकेतकों का पूरी तरह अभाव चिंताजनक था। गुलौआ चौक से शाहीनाका तक सड़क सपाट नजर आई किंतु दोनों तरफ अतिक्रमणों की समस्या देखने को मिली। इस वजह से अच्छी खासी चौड़ी सड़क पर भी तीन से चार जगहों पर ट्रेफिक जाम हुआ।

यातायात नियमों को मुंह चिढ़ा रहे मनमर्जी के स्पीड ब्रेकर

शहर की सड़कों पर बिना ट्रैफिक इंजीनियरिंग के बनाए गए मनमर्जी के स्पीड ब्रेकर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। सड़क से करीब आधा फीट तक ऊंचे इन ब्रेकरों से वाहन चालक जहां बहक कर भिड़ रहे हैं वहीं दिव्यांगों के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। शहर के व्यस्तम बाजार क्षेत्र गोपाल होटल से कांचघर मुख्य रेलवे स्टेशन की तक जाने वाले व्यस्तम मार्ग पर करीब 12 स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं। कांचघर बीमा अस्पताल के पास का स्पीड ब्रेकर इतना ऊंचा है कि अक्सर ही दिव्यागों की ट्राइसाइकिल फंस रही है। नगर निगम और अपनी सुविधा के लिए आस-पास के नागरिकों द्वारा बनाए गए स्पीड ब्रेकर यातायात व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे हैं।

अंधेर में नजर नहीं आते गडढे-

इसी तरह रेलवे स्टेशन की तरफ जाने वाले मार्ग पर बर्न कंपनी और रेलवे सराय स्कूल के ठीक पहले दो जगह सड़क पर गड्ढे हो गए हैं। इस मार्ग की करीब चार स्ट्रीट लाइट बंद है। जिसके कारण रात के अंधेरे में बीच सड़क के गड्ढे वाहन चालकों को नजर नहीं आते अक्सर यहां दो पहिया वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं।

जबलपुर अस्पताल के तिराहे में होते हैं हादसे-

शहर की में यातायात के हिसाब से तिराहे-चौराहों का निर्माण नहीं कराया गया है। जबलपुर अस्पताल के पास बना तिराहा इतना बेढंगा बनाया गया है कि यहां अक्सर वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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