जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब हक नहीं मिल पा रहा है। कृषि क्षेत्र मेंं हो रहे नए-नए प्रयोगों की वजह से परंपरागत खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसी तमाम समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ ने 19 दिसंबर को किसान गर्जना रैली का आयोजन किया है। यह रैली दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होगी। इस बारे में जानकारी देने संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद चौधरी ने मीडिया से चर्चा की। इस दौरान बताया गया कि किसानों को उनका वाजिब हक नहीं मिल पा रहा है। यह नहीं होना चाहिए।

भाकिसं नेता प्रमोद चौधरी ने बताया कि किसानों को उनकी लागत और परिश्रम के अनुपात में एमएसपी नहीं दी जा रही है। किसान को अन्य व्यवसायियों की तरह से सरकार की ओर से मदद नहीं की जा रही है। वो कृषि का कुशल प्रबंधन करता है, लेकिन लागत मूल्य की गणना में उसका योगदान अकुशल श्रमिक के बराबर गिना जाता है। किसान संघ ने किसानों को 50 प्रतिशत लाभांश के आधार पर उपज की एमएसपी तय किए जाने, कृषि कार्य में उपयोग किए जाने वाले औजारों एवं उपकरणों से जीएसटी समाप्त किए जाने सहित अनेक मांगों का प्रस्ताव सरकार को दिया है।

जीएम सरसो का विरोध

प्रमोद चौधरी ने कहा कि विदेश से मंगाई गई जीएम सरसो (जेनेटिकिली माडीफाइड सरसों) की प्रायोगिक तौर पर खेती कराए जाने की बात सरकार कह रही है। इससे देश में सरसो की परंपरागत खेती को नुकसान होगा, इसलिए भारतीय किसान संघ जीएम सरसों को देश में नहीं लांच होने देगा। 19 दिसंबर की गर्जना रैली में इस विषय को वजनदारी से उठाया जाएगा।

Posted By: Jitendra Richhariya

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