जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पूर्व बिशप पीसी सिंह के अधिपत्य से छीनने के बाद सद्भावना परिसर में बाल-भवन खोलने की तैयारी है। इस दिशा में प्रयास शुरू हो चुके हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से लिखे गए पत्र पर जिला प्रशासन संज्ञान लेता दिख रहा है।

पूर्व बिशप पीसी सिंह के कब्जे से छीनी गई बेशकीमती संपत्ति सद्भावना भवन में बाल भवन को संचालित करने की तैयारी की जा रही है। उम्मीद है कि नए परिसर में आकर बाल भवन के बच्चों को अच्छा वातावरण मिलेगा। फिलहाल बाल भवन गढ़ाफाटक के पास संकीर्ण गलियों में संचालित है।

यहां इतना स्पेस भी नहीं है कि बाल भवन में रजिस्टर्ड सभी बच्चे एक साथ जमा हो सकें। बाल भवन में साढ़े तीन सौ से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं, जो अलग-अलग विधाओं के हैं। ये बच्चे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर को छू चुके हैं। बाल भवन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित है, जिसकी ओर से कलेक्टर के नाम पत्र लिखकर बाल-भवन को सद्भावना परिसर में संचालित कराने की सिफारिश की गई थी। बाल भवन के अनुसार तत्कालीन कलेक्टर डा. इलैयाराजा टी ने इस मामले में सहमति जताते हुए बाल-भवन का पत्र एडीएम के पास भेेज दिया था। इस पत्र को लेकर फिर एक बार हलचल बढ़ गई है।

मिलेगा तैयारी को बेहतर स्थान

इस दिशा में चल रही कार्रवाई अगर अंजाम तक पहुंचती है तो बाल भवन के सैकड़ों बच्चों को अपना कौशल निखारने के लिए बेहतर स्थान और परिवेश मिलेगा। बता दें कि बाल भवन से इशिता विश्वकर्मा, श्रेया खंडेलवाल, उन्नति तिवारी, शांभवी पंड्या, रत्निक श्रीवास्तव जैसी अनेक प्रतिभाएं संबद्ध हैं। सद्भावना परिसर का बड़ा और खुला वातावरण बच्चों को उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराएगा।

इतना रकबा है सद्भावना भवन का

बताया जाता है कि जिस सद्भावना भवन में बाल भवन को स्थानांतरित करने की बात चल रही है- उसमें करीब 18,403 वर्ग फुट का एरिया है। इसमें 5263 वर्ग फुट में भवन निर्मित है जबकि 13140 वर्ग फुट का खाली मैदान है। इस संपत्ति का अनुमानित मूल्य दस करोड़ से ज्यादा है।

सवा महीना पहले हुई थी शासन के नाम

पूर्व बिशप पीसी सिंह के दखल वाली इस संपत्ति को 27 अक्टूबर को शासन के नाम पर दर्ज कराया गया था। इसके बाद से ही इस प्रापर्टी का उपयोग किसी शासकीय मद में किए जाने की चर्चाए चल रही थीं। यद्यपि मसीही समाज के लोग भी इस परिसर को उन्हें सौंपने की मांग करते रहे हैं।

इनका कहना है

बाल-भवन के पास जगह का अभाव है। इसलिए उसे सद्भावना-भवन में स्थानांतरित करने के लिए कलेक्टर के नाम पत्र लिखा गया था। उस पत्र पर प्रशासनिक स्तर से भी कार्रवाई चल रही है। उम्मीद है बाल-भवन के बच्चों को बेहतर परिवेश उपलब्ध हो सकेगा। -गिरीश बिल्लोरे, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग

Posted By: Jitendra Richhariya

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