जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। आर्डनेंस फैक्ट्री, सैनिक मुख्यालय सहित अनेक केंद्रीय विभाग होने के बाद भी जबलपुर में एक भी सैनिक स्कूल नहीं है। जबकि प्रदेश में सबसे अधिक केंद्रीय कर्मचारी जबलपुर में ही कार्यरत व निवासरत् हैं। जिन्हें अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए सैनिक स्कूल में प्रवेश कराने एक मात्र सैनिक स्कूल रीवा पर आश्रित रहना पड़ता है। प्रदेश का एक मात्र सैनिक स्कूल होने के कारण यहां भी दाखिला मिलना आसान नहीं होता।

उक्त जानकारी देते हुए मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री योगेंद्र दुबे ने जारी बयान में बताया कि रीवा की तर्ज पर जबलपुर में सैनिक स्कूल खोले जाने की जरूरत महसूस होने लगी है। संस्कारधानी जबलपुर में सैनिक स्कूल न होना सस्कारधानी की उपेक्षा प्रतीत हो रही है।

संघ के जिला अध्यक्ष अर्वेंद्र राजपूत, अवधेश तिवारी, नरेंद्र दुबे, अटल उपाध्याय, मुकेश सिंह, आलोक अग्निहोत्री, मुन्ना लाल पटेल, दुर्गेश पांडेय, सुरेंद्र जैन, शकील अंसारी आदि ने सांसद व जिले के विधायक व जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराने ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है।

ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को नहीं मिल रही कम्प्यूटर अधारित शिक्षा: एक और आधुनिक दौर में कप्यूटर का ज्ञान जरूरी हो गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के स्कूली विद्यार्थियों को कम्प्यूटर अधारित शिक्षा नहीं मिल पा रही है। ये आरोप मध्यप्रदेश जागरूक अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने लगाए हैं। समिति के प्रांतीय सचिव जियाउर्ररहीम, दिनेश गौड़ , स्टेनली नॉरबर्ट, हेमंत ठाकरे, आसाराम झारिया, गोपी शाह, विनोद सिंह, अजय मिश्रा ,मनीष मिश्रा, चैतन्य कुसरे, आकाश भील ने जारी बयान में बताया कि एक तरफ जहां आनलाइन शिक्षा का महत्व बढ़ रहा है वहीं ग्रामीण क्षेत्र में शासकीय स्कूल के विद्यार्थी अभी भी कम्प्यूटर की पहुंच से दूर है। अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन भी नहीं है। समिति पदाधिकारियों ने प्रत्येक शासकीय स्कूलों में कम्प्यूटर उपलब्ध कराने की मांग की है।

Posted By: Ravindra Suhane

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